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वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary

भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

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८८ वरिवस्यारहस्ये
वर्ण एवं उनके अर्थ में तादाम्यभाव ७६ २७०
ककारत्रय एवं 'सकल', 'प्रलयाकला तथा
'विज्ञानाकल' की अभेदात्मकता ७७ २७२
अकार एवं जीवों में अभेदात्मकता तथा एकार
का विद्यागत महत्त्व ७८ २७३
बिन्दुत्रय के साथ रुद्र, ईश्वर तथा सदाशिव की
अभेदात्मकता तथा शान्ति, शक्ति एवं शम्भु की
नाद के साथ अभेदात्मकता ७९ २७५
महाविद्या एवं सैतिस तत्त्वों में अभेदात्मकता
का प्रतिपादन ८० २७६
सम्प्रदायार्थ का स्वरूप ८१ २८०
'निगर्भार्थ' का स्वरूप ८२ २८२
देवी की गणेशरूपता ८३ २८३
देवी की ग्रहरूपता का प्रतिपादन ८४ २८४
देवी की नक्षत्र-रूपता का प्रतिपादन ८५ २८५
देवी की योगिनीरूपता ८६ २८६
देवी की प्राण, जीव एवं राशि के साथ तदात्मकता ८७ २८८
श्रीविद्या की कूटत्रयात्मकता एवं वाक्चतुष्टयात्मकता ८८ २८९
श्रीविद्या की ग्रहरूपत्मकता एवं नक्षत्ररूपात्मकता ८९ २९०
श्रीविद्या की योगिनीरूपात्मकता एवं राशिरूपात्मिकता ९० २९२
पंचदशी विद्या एवं देवी में अभेदात्मकता ९१ २९४
श्रीचक्र की ग्रहरूपत्मकता ९२ २९६
श्रीचक्र की नक्षत्ररूपता ९३ २९८
श्रीचक्र की योगिनीरूपात्मकता ९४ २९८
श्रीचक्र की राशिरूपता का प्रतिपादन ९५ ३००
पंचदशीविद्या के वर्णों के साथ चक्रों की एवं
चक्रों के साथ देवी की अभिन्नता का प्रतिपादन ९६ ३०१
वर्णमाला एवं पीठों में समानता ९७ ३०७
गणप, ग्रह, भ आदि के साथ पचपन
पीठों की एकात्मता ९८ ३०८