वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)
Vaisheshika Darshana with Hindi Bhashya
महर्षि कणाद द्वारा
स्रोत: स्वामीमेशिन यन्त्रालय · स्वामीमेशिन यन्त्रालय (उद्गम)
पृष्ठ 92, कुल 160 में से
संदर्भ में पढ़ें८८ वैशेषिकदर्शन-भाषानुवाद
(प्रत्यक्षाऽप्रत्यक्षाणाम्) प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष द्रव्यों का (संयोगस्य)
संयोग (अप्रत्यक्षत्वात्) प्रत्यक्ष न होने से (पञ्चात्मकम्) एक एक में
पाञ्च पाञ्च का संयोग (न) नहीं (विद्यते) है ॥
पृथिवी आदि एक एक कार्य द्रव्य में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अन्य चार
द्रव्यों का संयोग होता तौ पृथिवी प्रत्यक्ष न होती, प्रत्यक्ष होती है इस
लिये पृथिवी को पञ्चभूतात्मक नहीं कह सकते । इसी प्रकार जल और
तेज को समझो । वायु और आकाश, ये दोनों अप्रत्यक्ष हैं तब इन का
संयोग प्रत्यक्ष कैसे हो सकता है और जब संयोग प्रत्यक्ष नहीं तब किसी
कार्य द्रव्य को पञ्चभूतात्मक कहना नहीं बनता ॥ २ ॥
क्योंजी ! पृथिवी आदि कार्य द्रव्यों को संयोगस्वरूप न जानकर संयोग
से बना हुवा मानलें तब तौ उन को एक २ में पाञ्च पाञ्च के संयोग वाला
मान सकते हैं, इस में क्या दोष है ? उत्तर-
१७३-गुणान्तराऽभावाच्च ॥ ३ ॥
(गुणान्तराभावात्) अन्य गुणों के अभाव से (च) भी पृथिवी आदि
कार्य द्रव्य को पञ्चात्मक नहीं मान सकते ॥
यदि पृथिवी आदि कार्य द्रव्य संयोग से बने होते तौ अवश्य उन में
अन्य नये गुण पाये जाते जैसा कि हलदी और चूने के मिलाने से हलदी में
रक्तवर्ण पाया जाता है, परन्तु हम नहीं देखते कि पृथिवी आदि कार्य द्रव्यों
में कोई नया गुण पाया जाता हो, इस लिये पृथिवी आदि कार्य द्रव्यों को
पञ्चात्मक नहीं मान सकते ॥ ३ ॥
अच्छा पञ्चात्मक न सही, त्र्यात्मक तौ मान सकते हो ? उत्तर नहीं,
१७४-न त्र्यात्मकम् ॥ ४ ॥
(त्र्यात्मकम्) तीन तीन के संयोग से बनाहुवा भी (न) नहीं मान
सक्ते, क्योंकि अन्य गुणों को नहीं पाते ॥
जैसे पृथिवी आदि कार्य द्रव्य को अन्य नये गुणों के न पाये जाने से
एक एक में पाञ्च पाञ्च का संयोग नहीं मानाजासकता ऐसे ही अन्य गुणों के
न पायेजाने से एक एक को तीन तीन के संयोग वाला भी नहीं मान सक्ते
क्योंकि १-पृथिवी २-जल और ३-अग्नि, इन तीनों के गुण भी पृथिवी
आदि किसी एक द्रव्य में नहीं पाये जाते, इस लिये त्र्यात्मक मानना भी
ठीक नहीं ॥ ४ ॥