वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)
Vaisheshika Darshana with Hindi Bhashya
महर्षि कणाद द्वारा
स्रोत: स्वामीमेशिन यन्त्रालय · स्वामीमेशिन यन्त्रालय (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें६२ वैशेषिकदर्शन - भाषानुवाद
का अत्यन्ताऽभाव नहीं हो सक्ता, किन्तु घट पटादि का अत्यन्ताऽभाव हो
सक्ता है, और उस धूम हेतु के पर्वत अधिकरण में रहने से ( जिस में अग्नि
भी रहता है ) हेतुसमानाधिकरण हुआ । उस अभाव के प्रतियोगी घट
पटादि और अप्रतियोगी अग्नि (साध्य) के साथ धूम हेतु की समानाधिकरणता=
एक पर्वत अधिकरण में वर्त्तमान होना।=ही अग्नि साध्य में, धूम हेतु की व्याप्ति=
अन्वयव्याप्ति हुई । इस के विरुद्ध व्याप्ति व्यतिरेकव्याप्ति कहाती है ॥ १५ ॥
१३१-अप्रसिद्धोऽनपदेशः ॥ १५ ॥
( अप्रसिद्धः ) जिस में व्याप्ति न पाई जावे, वह ( अनपदेशः ) अहेतु
वा असद्धेतु वा हेत्वाभास भी कहाता है ॥
तौ क्या वैशेषिक में एक ही हेत्वाभास है ? नहीं, किन्तु-
१३२-असन् संदिग्धश्चाऽनपदेशः ॥ १६ ॥
( असन् ) असिद्ध ( च ) और ( संदिग्धः ) सन्देहयुक्त ( अनपदेशः )
हेत्वाभास होता है ॥
हेत्वाभास इस शास्त्र में दो प्रकार के हैं । एक-असत्=असिद्ध=विरुद्ध,
दूसरा-संदिग्ध=इसी को अनैकान्तिक कहते हैं ॥ १६ ॥ जैसे-
१३३-यस्माद्विषाणी तस्मादश्वः ॥ १७ ॥
( यस्मात् ) क्योंकि ( विषाणी ) सींगों वाला है, ( तस्मात् ) इस कारण
( अश्वः ) घोड़ा है ॥
यह असिद्ध हेत्वाभास का उदाहरण है । क्योंकि जिस २ के सींग हों
वह २ अश्व ( घोड़ा ) कभी नहीं होता ॥ १७ ॥ और-
१३४-यस्माद्विषाणी तस्माद्गौरित्यनैकान्तिकस्योदाहरणम्॥१८॥
( यस्मात् ) क्योंकि ( विषाणी ) सींग वाला है ( तस्मात् ) इस से ( गौः।)
बैल है ( इति ) यह ( अनैकान्तिकस्य ) अनैकान्तिक हेतु का ( उदाहरणम् )
उदाहरण है ॥
केवल बैल के ही सींग नहीं देखे जाते किन्तु भैंसे बकरे आदि के भी
देखे जाते हैं, इस लिये सींग वाला होना गौ बैल होने में हेतु तो है परन्तु
असाधारण हेतु नहीं, क्योंकि गौ बैल के अतिरिक्त अन्य बकरी आदि में भी
अतिव्याप्ति वाला है ॥ १८ ॥