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सर्वकोश
वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

Vaisheshika Darshana with Hindi Bhashya

महर्षि कणाद द्वारा

स्रोत: स्वामीमेशिन यन्त्रालय · स्वामीमेशिन यन्त्रालय (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished160 पृष्ठ

पृष्ठ 30, कुल 160 में से

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२६ वैशेषिकदर्शन-भाषानुवाद
जिसप्रकार घृतादि काष्ठ विकारों में अग्नि से द्रवत्व होजाता है, इसी
प्रकार रांगा, सीसा, लोहा, चान्दी, सोना और अन्य धातुओं का भी पिंघल
कर जल के समान द्रवत्व होजाता है ॥ ७ ॥
यदि कहो कि “ स्पर्शवान्वायुः ” यह वायु का लक्षण इस लिये उचित
नहीं कि प्रथम तो वायु का होना ही साध्य है, तब लक्षण से लक्ष्य जाना
जायगा । इस पर अदृष्ट चिन्ह ( लिङ्ग ) से उसको सिद्ध करने के लिये प्रथम
दृष्ट ( चाक्षुषप्रत्यक्ष ) लिङ्ग का उदाहरण देते हैं:—
५६-विषाणी ककुद्वान् प्रान्तेबालधिः सास्नावान्
इति गोत्वे दृष्टं लिङ्गम् ॥ ८ ॥
( विषाणी ) सींग वाला, ( ककुद्वान् ) ऊंची ककूद [ टाट ] वाला,
( प्रान्तेबालधिः ) पुच्छ के अन्तिम भाग में बालों वाला और ( सास्नावान् )
गले में लटक ने वाले मांस [ कमला ] वाला, यह ( गोत्वे ) बैल = गोजाति
होने में ( दृष्टम् ) दृष्ट ( लिङ्गम् ) लिङ्ग = चिन्ह वा लक्षण है ॥ ८ ॥ इसी प्रकार-
५७-स्पर्शश्च वायोः ॥ ९ ॥
( वायोः ) वायु का ( स्पर्शः ) स्पर्श ( च ) भी [ लिङ्ग ] है, जिस से
लिङ्गी वायु पहचाना जाता और सिद्ध होता है ॥ ९ ॥ तथा च-
५८-न च दृष्टानां स्पर्श इत्यऽदृष्टलिङ्गोवायुः ॥ १० ॥
( च ) और ( दृष्टानां ) दृष्टों = पृथिवी जल अग्नियों का ( स्पर्शः ) स्पर्श
गुण वा लिङ्ग ( न ) नहीं है ( इति ) इस कारण ( वायुः ) वायु ( अदृष्टलिङ्गः )
अदृष्ट लिङ्ग वाला है ॥ १० ॥
यदि कहो कि स्पर्श लिङ्ग से सिद्ध वायु कोई होगा, परन्तु यह कैसे
जानें कि यह वैशेषिकोक्त ९ द्रव्यों में का एक द्रव्य ही है ? उत्तर-
५९-अद्रव्यवत्त्वेन द्रव्यम् ॥ ११ ॥
( अद्रव्यवत्त्वेन ) द्रव्य वाला न होने से ( द्रव्यम् ) द्रव्य ही है ॥
वायु स्पर्श वाला है और स्पर्श द्रव्य नहीं, बस वायु द्रव्य वाला नहीं,
इस से वह स्वयं द्रव्य है ॥ ११ ॥