बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Brihad Viman Shastra / Vaimanika Shastra of Maharshi Bharadvaja
महर्षि भरद्वाज (टीकाकार: पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक) द्वारा
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यन्त्रसर्वस्वरूपकम्” श्लोक में इस विद्या का भण्डार वेद बताए गए हैं । उपर्युक्त उद्धरण से बढकर महर्षि
दयानन्द की इस स्थापना का कि “वेद सब सत्य विद्याओं का पुस्तक है" तथा विमानविद्या का स्थान
स्थान पर वेदों में वर्णन है और क्या प्रमाण हो सकता है ? जिस प्रकार इस ग्रन्थरत्न ने महर्षि दयानन्द
की वेदविषयक विशुद्ध विचारसरणि में वैदिक शोध के कार्य को प्रेरणा दी है उसी प्रकार यह
विमानविद्याविषयक अनुसंधानों और आविष्कारों को महती प्रेरणा प्रदान करेगा ।
श्री स्वामी ब्रह्ममुनि जी विद्यामार्तण्ड वैदिक अनुसन्धान का मूल्यवान् कार्य कर रहे हैं । प्रस्तुत भाष्य
उनके उसी प्रशंसनीय कार्यों का सुफल है जिसके लिए वे आर्य जगत् और विद्वत्समाज के धन्यवाद के
अधिकारी हैं । सार्वदेशिक सभा पर उनकी सदैव कृपा दृष्टि रहती है । सभा को उनके अनेक ग्रन्थों के
प्रकाशन का गौरव प्राप्त है, इस भाष्य को सभा की ओर से प्रकाशित करने का निष्प्रतिकार अवसर
प्रदान करके उन्होंने अपनी उसी कृपादृष्टि का परिचय दिया और सभा को उपकृत किया है ।
यह प्रकाशन बड़ा व्ययसाध्य था फिर भी सभा ने इसे प्रकाशित करके अपने एक महान
दायित्व की पूर्ति की है । आशा है जनता इससे यथोचित लाभ उठाएगी और शीघ्र सभा को व्ययभार
से मुक्त करके इसी प्रकार के अन्य उपयोगी प्रकाशनों को हाथ में लेने में समर्थ बनाएगी ।
स्वतन्त्र भारत में इस कोटि के अलभ्य एवं अत्यन्त मूल्यवान् ग्रन्थों का प्रकाशन हमारे राज्य
का एक विशिष्ट कर्त्तव्य है । सभा ने इस भाष्य को प्रकाशित करके राज्य और देश का ही एक बड़ा
कार्य सम्पन्न किया है जो हमारे देश के गौरव को बढाने वाला सिद्ध होगा । क्या हम आशा करें कि
राज्य और देश, सभा के इस कार्य का समुचित आदर करेगा ?
दयानन्द भवन, रामलीला मैदान, रामगोपाल
नई दिल्ली—१ प्रधान मन्त्री
माघ कृष्णा २०१५ वि० सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा, दिल्ली
तदनुसार २-२-१९५६ ई०