बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Brihad Viman Shastra / Vaimanika Shastra of Maharshi Bharadvaja
महर्षि भरद्वाज (टीकाकार: पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक) द्वारा
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संयोजयेत् कीलकाद्यैरनुलोमविलोमत ।
कीलसञ्चालनाच्चक्रभ्रमणं स्याद् यथा तथा ॥ ३१२ ॥
अग्नि ज्वालोन्मुखं कर्तुं प्रथमचक्रमीरितम् ।
मन्दमध्यमगाढज्वालाप्रकाशार्थमेव हि ॥ ३१३ ॥
द्वितीयचक्रमित्याहुस्तृतीयं तु यथाक्रमम् ।
समीकरणकार्यार्थं स्थापितं स्याद् यथाक्रमम् ॥ ३१४ ॥
अग्निकोशोपरि पुनः नालमेकं दृढं यथा ।
स्थापयेत् पट्टिकामध्ये ततो नालान्तरे क्रमात् ॥ ३१५ ॥
अग्नि जलने के कुण्डपर्यन्त प्रवेश में यथाविधि आदि मध्य तथा अन्त में तीन चक्र यथाक्रम
संयुक्त करे कील आदियों से अनुलोम विलोम रीति से जिससे कि कील के सञ्चालन से चक्रों का भ्रमण
हो सके । अग्नि को ज्वलनोन्मुख करने को प्रथमचक्र कहा है, मन्द मध्य तीव्र ज्वाला प्रकाशार्थ ही द्वितीय
चक्र को कहा है, तृतीय चक्र को यथाक्रम समीकरण कार्यार्थ—शान्त करणार्थ यथाक्रम स्थापित किया
है । फिर अग्निकोश के ऊपर एक नाल दृढ स्थापित करे फिर पट्टिका के मध्य नाल के अन्दर क्रम
से—॥ ३११-३१५ ॥
प्रदक्षिणावृत्तवक्रतन्त्रीस्सन्धारयेत् ततः ।
नालवत् पट्टिका तस्योपर्याच्छाद्य प्रमाणतः ॥ ३१६ ॥
धूमाकर्षणनालं च कल्पयित्वा ततः परम् ।
अग्निकोशान्तभागे संस्थापयित्वा यथाविधि ॥ ३१७ ॥
पूर्वोक्तवक्रतन्त्रीमुखप्रदेशे नियोजयेत् ।
अग्नेर्धूमं समाहृत्य जलकोशे नियच्छति ॥ ३१८ ॥
अग्निकोशाज्ज्वलकोशावरणान्तं यथाविधि ।
जलनालानि सर्वत्र योजयेत् सप्तसङ्ख्यया ॥ ३१९ ॥
जलकोशावरणदेशे सर्वत्रात्यन्तवेगतः ।
पञ्चसहस्रलिङ्गोष्णाव्याप्तिरेतैर्भवेत् क्रमात् ॥ ३२० ॥
—घूमने वाली टेढी तारों को लगावे, नाल की भांति पट्टिका को उसके ऊपर प्रमाण से ढककर
धूमाकर्षण नाल भी बना कर अग्निकोश पर्यन्त भाग में यथाविधि संस्थापित करके पूर्वोक्त टेढी तारों के
मुख प्रदेश में जोड दे । अग्नि के धुएं को लेकर जल कोश में नियन्त्रित करता है अग्निकोश से जल-
कोश पर्यन्त यथाविधि सात जलनालों को सर्वत्र लगावे, जलकोश के आवरण प्रदेश में सर्वत्र अत्यन्त वेग
से इनसे पांच सहस्र लिङ्ग-डिग्री की उष्णता व्याप्ति हो जावे ॥ ३१६-३२० ॥
तेन तप्तं जलं पश्चादौष्म्यं धूमाकृतिं लभेत् ।
जलकोशप्रमाणं तु वितस्त्यष्टकमुच्यते ॥ ३२१ ॥
त्रिचक्रकीलनालानि जलकोशे यथाक्रमम् ।