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सर्वकोश
बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Brihad Viman Shastra / Vaimanika Shastra of Maharshi Bharadvaja

महर्षि भरद्वाज (टीकाकार: पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक) द्वारा

DevanagariHindipublished368 पृष्ठ

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पृष्ठ 209

१८६ ] [ बृहद् विमानशास्त्र
त्रिधा यदुक्तं शरदि शक्तिभेदोत्र शास्त्रतः ।
तस्स्वरूप प्रसङ्गत्या सग्रहेण निरूप्यते ॥१७॥
पश्चादादित्यकिरणसम्पर्कात् ता यथाक्रमम् ।
विभज्यन्ते त्रिधा सम्यक् शक्तिसम्मेलनक्रमात् ॥१८॥
वसन्त में पांच प्रकार की ग्रीष्म ऋतु में सात प्रकार से वर्षा ऋतु में आठ प्रकार की शरद्ऋतु
में तीन प्रकार की कही हैं । हेमन्त ऋतु में दश प्रकार की कही शिशिर ऋतु में दो प्रकार की । इस क्रम
से शक्तियां छ प्रकार से विभक्त होती हैं । शरद् ऋतु में जो शक्तिभेद तीन प्रकार का है उसका स्वरूप
प्रसङ्ग से संक्षेप से निरूपित किया जाता है, पश्चात सूर्यकिरण के सम्पर्क से यथाक्रम तीन प्रकार से
विभक्त हो जाती हैं शक्तिसम्मेलन के क्रम से ॥ १७-१८ ॥
तासां नामानि शास्त्रोक्तप्रकारेणाभिवर्ण्यते ।
शीतज्वाला शैत्यदंष्ट्रा तथा शैत्योद्गमा क्रमात् ॥ १९ ॥
सम्मिलित्वा शीतरसवातशक्तिरभूत् स्वतः ।