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बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Brihad Viman Shastra / Vaimanika Shastra of Maharshi Bharadvaja

महर्षि भरद्वाज (टीकाकार: पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक) द्वारा

DevanagariHindipublished368 पृष्ठ

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पृष्ठ 15

बृहद् विमानशास्त्र
की
संक्षिप्त विषयसूचि
कापी संख्या १--
विषय पृष्ठ
महर्षिभरद्वाजकृत "यन्त्रसर्वस्व" ग्रन्थ का एक प्रकरण यह "वैमानिक
प्रकरण" है जिसमें ऐसे ४० प्रकरण थे। "वैमानिक प्रकरण" का ८ अध्यायों
१०० अधिकरणों ५०० सूत्रों में निबद्ध होना कहा गया है। यन्त्रकला जैसे इस ग्रन्थमें
भी आस्तिकता का प्रदर्शन करने के लिये मोक्षम् को मुमुक्षुओं का विमान बतलाया।
वैमानिक प्रकरण से पूर्व 'विमानचन्द्रिका, व्योमयानतन्त्र, यन्त्रकल्प, यानबिन्दु,
खेटयानप्रदीपिका, व्योमयानार्कप्रकाश' इन विमानविषयक छ शास्त्रों का विद्यमान
होना जोकि क्रमश नारायण, शौनक, गर्ग, वाचस्पति, चाक्रायणि, धूण्डिनाथ
महर्षियों के रचे हुए थे। महर्षि भरद्वाज द्वारा वेद का निर्मन्थन कर "यन्त्रसर्वस्व"
ग्रन्थ को मक्खन के रूप में निकाल कर दिए जाने का कथन†। विमान शब्द का
अर्थ सूत्रकार महर्षि भरद्वाज तथा आचार्य विश्वम्भर आदि के अनुसार वि-पक्षी की
भांति गति के मान से एक देश से दूसरे देश एक द्वीप से दूसरे द्वीप और एक लोक
से दूसरे लोक को आकाश में उडान लेने-पहुँचने में समर्थ यान है। अपितु पृथिवी
जल और आकाश में तीनों स्थानों में गति करने वाला बतलाया गया (जिसे आगे त्रिपुर
विमान नाम दिया है)। विमान के ३२ रहस्यों का निर्देश करना, यथा-विमान का
अदृश्यकरण, शब्दप्रसारण, लङ्घन, रूपाकर्षण, शब्दाकर्षण, शत्रुओं पर धूमप्रसारण
शत्रु से बचाने को स्वविमान का मेघावृत करना, शत्रु के विमानों द्वारा घिर जाने पर
उन पर ज्वालाशक्ति को प्रसारित करना-फेंकना, दूर से आतेहुए शत्रुविमान पर ४०८७
तरङ्गे फेंक कर उड़ने में असमर्थ कर देना, शत्रुसेना पर असह्य महाशब्द संघातरूप
(शब्दबम) फेंक कर उसे भयभीत वधिर शिथिल तथा हृद्रोग से पीडित कर देना आदि।
आकाश में विमान के सम्मुख विमानविनाशक आकाशीय पाच आवर्त (बवण्डरों) का
† निर्मथ्य तद्वेदाम्बुधि भरद्वाजो महामुनि ।
नवनीत समुद्धृत्य यन्त्रसर्वस्वरूपकम् ।।१०।।