बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Brihad Viman Shastra / Vaimanika Shastra of Maharshi Bharadvaja
महर्षि भरद्वाज (टीकाकार: पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक) द्वारा
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(लाईब्रेरी) से पुस्तकों के उपयोग आदि की सर्व सुविधाएं हमें प्रदान करने की महती कृपा की है। अन्त
में सार्वदेशिक आर्यप्रतिनिधि सभा का भी मैं धन्यवाद करता हूँ जिसने मेरे द्वारा समर्पित इस भेंट का
स्वागत कर इसे प्रकाशित किया है। पुन रसायनाचार्य, आयुर्वेदाचार्य, खनिजशास्त्री, भूगर्भशास्त्री, खगोल-
विद्यावेत्ता ज्योतिषी एवं वैज्ञानिक विद्वान् महानुभाव इस का अवलोकन कर इस में आए विविध यन्त्रों
धातुप्रसङ्गों विद्युत् शक्तियों रेडियो-सकेतों राकेट जैसी बातों का विचार कर उनके सम्बन्ध में प्रशस्त
प्रकाश डालें और अपने विचार एव सम्मतिया हमारे पास भेजने की कृपा करें। एतदर्थ ही हम इस कार्य
मैं नि स्वार्थ लगे और इसे प्रकाशित किया है।
विज्ञप्ति—ग्रन्थ के सन्दिग्ध शब्दों और शब्दार्थों के आगे प्रश्न द्योतक चिह्न ? दे दिया गया है।
भवदीय—
स्वामी ब्रह्ममुनि परिव्राजक
१० ६-१६५८ ई०