त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें62 त्रिशतिका
मूलज्ञानार्थ न्यासः 1 12
100 0 लब्धं मूलं 60।
5 36
शतफलेऽज्ञाते न्यासः 1 12
100 60 लब्धं शतफलम् 5
0 36
प्रमाणकालेऽज्ञाते न्यासः 0 12
100 60 लब्धं प्रमाणकालः 1
5 36
सुक्षेमा अनुवाद-100/- रु. का 1 महीने का ब्याज 5/- रु. हो तो 60/-
रु. का 1 वर्ष या 12 महीने का ब्याज फल कितना होगा। इस फल के आधार पर
काल तथा इन दोनों के आधार पर मूलधन को ज्ञात करो। (इनके आधार पर
शतफल तथा प्रमाण भी ज्ञात करो।)
अनुशीलन-इस प्रकार के प्रश्नों में 5 राशियाँ प्रस्तुत की जाती हैं। इनके
द्वारा एक अन्य छठी राशि को ज्ञात करना होता है। अतः इन्हें पञ्चराशिक नाम
दिया गया है। इन प्रश्नों में दो-दो राशियाँ आपस में गुणित होकर अन्य से संगत
मान बनाती हैं। इस दशा में समानुपाती प्रश्न होता है। अथवा एक-एक राशि अन्य
से समानुपात तथा दूसरी एक-एक राशि अन्य से व्युत्क्रमानुपात बनाती हैं। इस
दशा में समानुपात के सूत्र से प्रथम राशि समूह की चतुर्थ राशि ज्ञात करने के
पश्चात् व्युत्क्रमानुपात के सूत्र से द्वितीय राशि समूह की अज्ञात राशि का पता
लगाया जाता है। इस दशा में समानुपात तथा व्युत्क्रमानुपात के पूर्वोक्त सूत्र तथा
समीकरण के पूर्वोक्त नियम ही मूलतः क्रियाशील होते हैं।
इस प्रकार के प्रश्न मुख्यतः ब्याज के प्रश्नों से सम्बन्धित हैं। त्रिशतिकाकार
ने ऐसे प्रश्नों को आसान रीति से सिद्ध करने का प्रयास किया है। इनके अनुसार
इन नामों वाली संख्याओं को क्रम से रख लेते हैं-
प्रमाण राशि पक्ष इच्छा राशि पक्ष
1 प्रमाण काल 12 इच्छा काल (T)
100 प्रमाण धन 60 इच्छा धन (P)
5 प्रमाण फल (R) x अज्ञात फल (ब्याज)