त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिशतिका 61
सुक्षेमा अनुवाद- विद्वन्! यदि सूत्र के एक निश्चित परिमाण से क्रमशः 3
तथा 9 चौड़ाई तथा लम्बाई वाले 200 कम्बल निर्मित होते हैं। तो उतने ही परिमाण
से 2 तथा 6 चौड़ाई, लम्बाई वाले कितने कम्बल निर्मित होंगे।
अनुशीलन- स्पष्टतः जितने छोटे कम्बल होंगे उतने ही अधिक संख्या में
कम्बल बनेंगे। यहाँ 3 × 9 = 27 वर्गहस्त तथा 2 × 6 = 12 वर्गहस्त क्षेत्रफल मानने
पर-
27 × 200 5400
──────── = ──────── = 450 कम्बल प्राप्त होंगे।
12 12
अथ पञ्चसप्तनवराशिकेषु करणसूत्रमार्या
नीतफले ऽन्यं पक्षं विभजेद् बहुराशिपक्षम Fred?ितरेण।
छेदानां व्यत्यासं कृत्वाभ्यासं च राशीनाम्॥ ३१॥
प्रमाण फल (R) का व्यत्यास या स्थान-परिवर्तन करके उन राशियों का
अभ्यास या गुणित करके बहुराशि पक्ष या अधिक राशि के गुणनफल को इतर या
अल्पराशि पक्ष अर्थात् अल्प राशि के गुणनफल से भाग देने पर पञ्चराशिक की
अज्ञात राशि प्राप्त होती है।
उदाहरणम्
मासेन पञ्चकशते षष्टेर्वर्षेण किं फलं भवति।
फलतश्च कथय कालं ताभ्यामज्ञातमूलं च^२॥ ४४॥
न्यासः 1 12
100 60 लब्धं फलम् 36।
5
कालज्ञानार्थं न्यासः 1 0
100 60 लब्धं कालो मासाः 12
5 36
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१. तुल. ब्रा.स्फु.सि. 12.11, पाटी-गणित सू. 45, ग.सा.सं. 5.32, म.सि. 15.26-27, ग.ति.पृ.
74, सि.शे. 13.15, लीलावती पाञ्चराश्यादिकम् श्लोक 9
२. पाटी-गणित उदा. 39, ग.सा.सं. 5.33, ग.ति.पृ. 75 लीलावती