त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें56 त्रिशतिका
अत्र त्रैराशिकद्वयम्
यद्येकस्मिन् हारे अष्टौ सेतिकाः स्यु ततो हारविंशत्या कति सेतिकाः स्युरिति।
न्यासः।। 1। 8। 20।। लब्धं सेतिकाः 160
पुनस्त्रैराशिकम्
यदि सेतिकाषट्केनैको हारस्तत् सेतिकाशतेन षष्ट्यधिकेन कति हाराः स्युरिति
न्यासः।। 6। 1। 160। लब्धं हाराः 26 हारभागाश्च 2/3
सुक्षेमा अनुवाद-यदि एक हार में 8 सेतिका या गुरिया हों तो 20 हार में
कितनी गुरियाँ मापी जावेंगी।
श्लेष से अन्य प्रश्न- यदि 6 गुरिया से 1 हार बनता है तो 20×8 = 160
गुरिया से कितने हार बनेंगे।
अनुशीलन-सूत्रानुसार-
प्रथम प्रश्न-
8×20 = 160 गुरियाँ
द्वितीय प्रश्न-160/6 = 26 + 4/6 अर्थात् 26 पूर्ण हार, 2/3 भाग
अन्यदुदाहरणम्
षोडशवर्णककाञ्चनसुवर्णशतमष्टषष्टि-संयुक्तम्।
परिवर्त्य लभ्यते कियदेकादशवर्णकं कनकम्१॥ ३९॥
अत्रापि त्रैराशिकद्वयम्
यद्येकस्मिन् सुवर्णे षोडशवर्णकाः कल्याणसुवर्णस्य षोडशमाषका इत्यर्थः।
तत्सुवर्णशतेऽष्टषष्ट्यधिके कति वर्णकाः स्युरिति। न्यासः।। 1। 16। 168। लब्धं
वर्णकाः 2688
पुनस्त्रैराशिकम्
यद्येकादशभिर्वर्णकैरैकः सुवर्णस्ततः षड्विंशत्याष्टाशीत्यधिकया कियन्तः सुवर्णाः
स्युरिति न्यासः 11। 1। 2688। लब्धं सुवर्णाः 244। माषाः 5। गुञ्जाः 4।
गुञ्जाभागाश्च 1/11।।
१. तुल. पाटी-गणित उदा. 36, ग.सा.सं. 5.18, ग.ति.पृ. 74