त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
DevanagariHindipublished208 पृष्ठ
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54 त्रिशातिका
धान्यद्रोणः सार्धः कुडवत्रितयं च लभ्यतेऽष्टाभिः।
तद् द्रोणयुक्तखार्या किं मूल्यं कथ्यतामाशु१।। ३३।।
आद्यन्तयोः कुडवैन्यासः ९९/१ 8/१ 1088/१
लब्धानि रूपाणि 87 भागाश्च ९१/९९
सुक्षेमा अनुवाद-३/२ द्रोण तथा 3 कुडव अर्थात् 99 कुडव धान्य का मूल्य
8 रूप है तो 1 द्रोण से युक्त 1 खारी अर्थात् 1088 कुडव धान्य का मूल्य क्या
होगा।
अनुशीलन-यहाँ सूत्रानुसार-
8 × 1088/99 = 8704/99 = 87 ९१/९९ रूप मूल्य
अन्यदुदाहरणम्
यत्र सुवर्णो लभते रूपाणां सप्ततिं त्रिभागयुताम्।
तत्रैको माषः किं दशभागोनः सखे कथय।। ३४।।
न्यासः 16/1 70 1
1/3 1/10 लब्धानि रूपाणि 3, भागाश्च 153/160
सुक्षेमा अनुवाद-1 सुवर्ण या 16 माष से 70 1/3 या 211/3 रूप प्राप्त होते हैं।
तो 1- 1/10 अर्थात् 9/10 माष से कितने रूप प्राप्त होंगे।
अनुशीलन-यहाँ सूत्रानुसार-
(211/3 × 9/10) / 16 = 633/10 × 1/16 = 633/160 = 3 153/160 रूप
अन्यदुदाहरणम्
पंगुः प्रयाति कश्चिद् दिवसत्रितयेन योजनाष्टांशम्।
योजनशतं स यास्यति निगद्यतां केन कालेन२।। ३५।।
न्यासः 1/8 3/1 100 लब्धं वर्षाणि 6 मास 8
सुक्षेमा अनुवाद-कोई लंगड़ा 1/8 योजन 3 दिन में पार करता है तो वह 100
योजन कितने दिन में पहुँचेगा।
१. तुल. पाटी-गणित उदा. 27-28, ग.सा.सं. 5.2, म.सि. 15.24-25, ग.ति.पृ. 68, लीलावती
त्रैराशिक उदा. 3
२. उदा. 30, ग.सा.सं. 5.3.4, ग.ति.पृ. 72