त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें48 त्रिशतिका
पादः पादेन संयुक्तस्त्र्यंशस्त्र्यंशेन संयुतः।
पञ्चांशः पञ्चमांशेन दृष्टश्चैकादशः पृथक्।। २९।।
न्यासः ¼ ⅓ ⅕ दृश्यम् 11, लब्धं हस्ताः 3600
¼ ⅓ ⅕
इति स्तम्भोद्देशकाः।
सुक्षेमा अनुवाद-किसी विशाल पहाड़ का पाद या एक चौथाई अपने
चौथाई के चौथाई से युक्त, इसी प्रकार एक तिहाई अपने तिहाई के एक तिहाई से
तथा ⅕ अंश अपने ⅕ के पाँचवें अंश से युक्त होने पर 11 हाथ अलग से दिखता
है, उसकी कुल कितनी लम्बाई है।
अनुशीलन-यहाँ प्रश्नानुसार-
¼ + (¼ × ¼) + ⅓ + (⅓ × ⅓) + ⅕ + (⅕ × ⅕)
⇒ ¼ + 1/16 + ⅓ + 1/9 + ⅕ + 1/25 = 900+225+1200+400+720+144 / 3600
= 3589 / 3600
कल्पित 1 राशि से घटाएँ ⇒ 1 - 3589/3600 = 11/3600
शेष से दृश्य का भाग (3600 × 11) / 11 = 3600 हाथ
बीजगणितीय समीकरण के अनुसार-
¼ + 1/16 + ⅓ + 1/9 + ⅕ + 1/25 = 3589/3600
⇒ 3589/3600 x + 11 = x
⇒ 3589 x + 39600 = 3600x
⇒ 3600 x - 3589 x = 39600
⇒ 11 x = 39600
⇒ x = 39600 / 11
= 3600 हाथ