त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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त्रिशतिका 47
प्रोत्फुल्लाम्भोजखण्डे रविकरदलिते त्रिंशदंशोऽभिरेमे।
तत्रैको मत्तभृंगो भ्रमति नभसि चेत् का भवेद् भृंगसंख्या¹॥ २८॥
न्यासः १/६ १/३ १/४ १/५ १/३० दृश्यम् 1 लब्धं भृंगाः 60
सुक्षेमा अनुवाद-भ्रमरसमूह का 1/6 भाग पाटल पर, 1/3 भाग कदम्ब पर, 1/4
भाग आम के वृक्ष पर, 1/5 भाग चम्पा पुष्पों पर, तथा 1/30 भाग सूर्य की किरणों से
खिले हुए कमल-पुष्पों पर रमण करने लगा। उनमें से केवल 1 मतवाला भौंरा
आकाश में उड़ रहा था। कुल भौंरों की संख्या बताओ।
अनुशीलन-यहाँ पूर्वोक्त विधि के अनुसार-
भौरों के सभी उपविभागों का योग⇒
1/6 + 1/3 + 1/4 + 1/5 + 1/30 = (10+20+15+12+2) / 60 = 59 / 60
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