सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 72, कुल 208 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 72

44 त्रिशतिका
1 से कुल योग का व्यवकलन ⇒ 1 - 3/4 = 1/4
शेष से दृश्य का भाग 3/2 ÷ 1/4 = 3/2 × 4/1 = 12/2 = 6
बीजगणितीय समीकरण के अनुसार–
1/2 + 1/12 + 1/6 = 3/4
⇒ 3/4x + 3/2 = x
⇒ (3x+6) / 4 = x
⇒ 3x+6 = 4x
⇒ 4x -3x = 6
= x = 6
इस प्रकार के समीकरणों से सभी संक्रियाओं का कारण भी सर्वथा स्पष्ट
हो जाता है।
कामिन्या हारवत्याः सुरतकलहतो मौक्तिकानां त्रुटित्वा।
भूमौ यातस्त्रिभागः शयनतलगतः पञ्चमांशश्च दृष्टः।।
आत्तः षष्ठः सुकेश्या गणक दशमकः संगृहीतः प्रियेण।
दृष्टं षट्कं च सूत्रे कथय कतिपयैर्मौक्तिकैरेष हारः।। २६।।
सुक्षेमा अनुवाद-सुरत कलह के समय मोती के हार वाली किसी कामिनी
का हार टूट कर गिर पड़ा। उस हार के 1/3 मोती धरती पर, 1/5 बिस्तर पर देखे गए।
उसके 1/6 मोती सुन्दर केशों वाली को प्राप्त हो गए तथा 1/10 उसके प्रिय ने चुन
लिये। अब केवल शेष 6 मोती धागे में लगे हुए पाए गए। हे गणक! बताओ, वह
हार कुल कितने मोतियों का था।
अनुशीलन-परवर्ती गणित शास्त्र में इस प्रकार के श्लोक बहुत प्रसिद्ध हुए।
भास्कराचार्य ने ‘इष्ट कर्म’ के अन्तर्गत ‘त्रिशतिका’ का नाम लेकर इस प्रकार के
प्रश्न उद्धृत किये हैं। इन्हें ‘इष्ट कर्म’ नाम देने का कारण यह है कि इन प्रश्नों
के हल के लिये पहले किसी कल्पित इष्ट संख्या को स्वीकार करना पड़ता है।
श्रीधराचार्य ने श्लोक 27 में ऐसी इष्ट संख्या 1 को माना है।
इस प्रकार प्रस्तुत प्रश्न का हल–
मोती के सभी अंशों का योग ⇒ 1/3 + 1/5 + 1/6 + 1/10 = 24/30
कल्पित इष्ट संख्या 1 से व्यवकलन ⇒ 1 - 24/30 = 6/30 = 1/5
शेष से दृश्य का भाग ⇒ 6 ÷ 1/5 = 6× 5 = 30