त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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सुक्षेमा अनुवाद-रूप या पूर्ण 1 राशि में से स्तम्भ के अनेक अंशों के योग
को घटा कर शेष से दृश्य को भाग देने पर फल प्राप्त होता है।
अनुशीलन-यहाँ किसी अज्ञात राशि की कुछ भिन्न राशियाँ तथा एक पूर्ण
ज्ञात राशि का प्रयोग होने पर अज्ञात राशि को प्राप्त करने का नियम बताया गया
है। यह सर्वथा अंकगणित विधि है।
उदाहरणम्
अर्धषडंशद्वादशभागा जलपंकबालुकान्तःस्थाः।
दृश्यं हस्तद्वितयं कथय सखे स्तम्भपरिमाणम्॥ २३॥
सुक्षेमा अनुवाद-किसी खम्भे की कुल लम्बाई का ½, ⅙ तथा 1/12 भाग
क्रमशः जल, कीचड़ तथा बालू में हैं। साथ ही 2 हाथ ऊपर दिखाई पड़ रहा है।
खम्भे की कुल लम्बाई बताओ।
अनुशीलन-यहाँ पूर्वोक्त विधि अनुसार-
भिन्न संख्याओं का योग ⇒ ½ + ⅙ + 1/12 = 9/12 = ¾
1से योग को घटाना ⇒ 1- ¾ = ¼
शेष से दृश्य का भाग ⇒ 2 ÷ ¼ 2×4 = 8
इस प्रकार के प्रश्न बीजगणितीय समीकरण से भी भली प्रकार हल हो
सकते हैं। जैसे प्रस्तुत प्रश्न-
½ + ⅙ + 1/12 = ¾
⇒ ¾ x +2 = x
⇒ 3x + 8 = 4x
⇒ 4x -3x = 8
⇒ x = 8
अन्यदुदाहरणम्
स्तम्भस्य भागार्धनवाष्टषट्काः केदारपंकोदरशैवलेषु।
हस्तद्वयं दृश्यमथांगुलं च स्तम्भप्रमाणं वद शीघ्रमेतत्॥ २४॥
न्यासः ½ ⅑ ⅛ ⅙ दृश्यमंगुलात्मकम् 49, लब्धं स्तम्भ-प्रमाणं हस्ताः २१।
१. तुल. त्र्यंशषडंशा नद्याः जलपंकबालुकान्तःस्था।
स्तम्भस्य करत्रितयं दृश्यं तन्मानमाचक्ष्व।। - पाटीगणित उदा. 96