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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 7, कुल 208 में से

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( vii )
धूलि-कर्म के लिये 'हिसाब-अल्-गुबार' तथा अंकों के लिये 'हरूफ अल् गुबार'
शब्द प्रचलित हुए। यूरोप में भी किसी समय गिनती के लिये छोटे छोटे लट्टू वाली
पाटी का प्रचलन था। इसे इंग्लिश में abacus कहा जाता था। यह शब्द हिब्रू के
धूल अर्थ वाले abak से तथा पाटी अर्थ वाले ग्रीक शब्द abakos से विकसित
हुए थे१।
शब्द बताते हैं कि भारत तथा शेष विश्व के विद्वानों ने कितनी कठिनाइयों
के बीच गणित जैसे शास्त्र का विकास किया था। आधुनिक युग के प्रारम्भ तक
भी असीम विपन्नताओं के मध्य इन विद्वानों ने इन शास्त्रों के विकास का क्रम
जारी रखा था। हींज हैबर द्वारा लिखित 'तारे, मनुष्य और परमाणु' पृ. 73 के
अनुसार- "कैपलर और न्यूटन ने तो प्रकृति के इन नियमों को चिड़ियों के परों से
लिखा था वह भी मोमबत्तियों की रोशनी में। फिर भी इन्हीं के साथ आधुनिक युग
का आरम्भ हुआ था!!"
लेखक का परिचय तथा काल- यह खेद का विषय है कि गणित के
इस विश्रुत लेखक के विषय में हमें अत्यन्त स्वल्प जानकारी प्राप्त है। लेखक ने
स्वयं अपने माता-पिता, जन्म-स्थान आदि के विषय में कुछ नहीं लिखा है।
त्रिशतिका के प्रथम श्लोक से केवल इतना ज्ञात होता है कि वे शैव थे। क्योंकि
उन्होंने शिव को प्रणाम किया है। पाटी-गणित के प्रारम्भ में भी उन्होंने सृष्टि,
स्थिति, संहार के कारण अजन्मा ईश्वर को नमस्कार निवेदित किया है। परवर्ती
लेखकों ने भी श्रीधराचार्य के जीवन-वृत्त के विषय में कोई प्रकाश नहीं डाला है।
इनके काल के विषय में भी अनेक मतभेद हैं। पं. सुधाकर द्विवेदी का
मानना है कि प्रशस्तपादभाष्य के प्रख्यात 'कन्दली' व्याख्याकार श्रीधराचार्य तथा
प्रस्तुत ग्रन्थ के प्रणेता आचार्य एक ही हैं। कन्दली व्याख्या की रचना उसके
अन्तिम श्लोक के अनुसार 913 शकाब्द में की गई थी। इस प्रकार इसका रचना
काल 991 ई. है।
विश्रुत इतिहासकार डा. ए. बीः कीथ ने बिना किसी परीक्षा या. प्रमाण का
उल्लेख करते हुए यह काल स्वीकार कर लिया है२। डा. ब्रजमोहन आदि विद्वान्
भी इस मत के समर्थक हैं३।


१. देखें Oxford English Dictionary में 'abacus' शब्द
२. History of Sanskrit literature - Dr. A.B.Keith - हिन्दी भाषान्तर पृ. 663.
३. गणित का इतिहास - डा. ब्रजमोहन पृ. 92.