त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें40 त्रिशतिका
1- संक्रिया का निरूपण → 83/16 पुराण के अंश और हर को
20 काकिणी का रूप देने के लिये दोनों का 4 से गुणन। साथ ही
1- अंश में 1 काकिणी का सम्मिलन→
5 83/16 × 4/4 + 1 = 333/64
पुनः उसी प्रकार सवर्णन करने पर–
6659 संक्रिया का निरूपण– 333/64 पुराण के अंश और हर को
1280 वराटक में बदलने के लिये दोनों का 20 से गुणन।
1- प्रश्नानुसार अंश से 1 वराटक कम करने पर–
5 333/64 × 20/20 - 1 = 6659/1280
पुनः अन्तिम का सवर्णन करने पर–
33294 = 16647 अंश और हर को 5 से गुणित करके प्रश्नानुसार
6400 = 3200 अंश से 1 कम करने पर– 6659/1280 × 5/5 - 1 = 33294/7400
इस प्रकार सवर्णित होने पर 16647/3200 पुराण = 5 647/3200 पुराण
इसकी उपपत्ति के लिये अन्य प्रकार से प्रश्न को हल करते हैं–
श्लोक के अनुसार प्रश्न का आकार
5/1 पुराण + 3/1 पण + {1/1 - 1/20 - (1/20 × 1/5) काकिणी}
नोट- 20 वराटक की 1 काकिणी
⇒ 5/1 पुराण + 3/1 पण + {1/1 - 1/20 - 1/100 काकिणी
⇒ 5/1 पुराण + (3/1 पण × 1/16) + (47/50 काकिणी × 1/64)
नोट- 16 पण का 1 पुराण, 4 काकिणी का 1 पण
अर्थात् 64 काकिणी का 1 पुराण। अतः–
⇒ 5/1 पुराण + 3/16 पुराण + 47/3200 पुराण = 16647/3200 पुराण
श्लोक की व्याख्या के अनुसार प्रश्न का आकार
5/1 पुराण + 3/16 पुराण + {1/4 - (1/4 × 1/20) - (1/4 × 1/20 × 1/5) पण}
नोट-20 वराटक की 1 काकिणी
4 काकिणी का 1 पण अतः 80 वराटक का 1 पण
⇒ 5/1 पुराण + 3/16 पुराण + (1/4 - 1/80 - 1/400 पण)
⇒ 5/1 पुराण + 3/16 पुराण + (94/400 पण × 1/16)