त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिशतिका 37
1 1 1 1 1
1/6 1/10 1/3 1/9 1/2 लब्धं रूपाणि 30
सुक्षेमा अनुवाद-1 का उसी 1 के छठे भाग अर्थात् 1/6 से भाग, इसी प्रकार
1 का 1/10 1/3 1/9 1/2 से भाग करके प्राप्त संख्या का योग सोच कर बताओ, यदि
गणित विधि जानते हो।
अनुशीलन-यहाँ पूर्वोक्तानुसार-
1 ÷ 1/6 = 1×6 = 6 इसी प्रकार अगली संख्याएँ प्राप्त है।
अतः 6 + 10 + 3 + 9 + 2 = 30
अन्यदुदाहरणम्
त्र्यादिषदन्तैश्छेदैर्व्याद्यंशकभागराशिसम्भक्तम्।
रूपं पृथक् कियत् स्यात् संयोगे वित्तमाचक्ष्व।। १९।।
न्यासः 1 1 1 1
2/3 3/4 4/5 5/6 लब्धं रूपाणि 5, भागाश्च 17/60
सुक्षेमा अनुवाद-ऐसी भिन्न संख्याएँ जिनके हर क्रमशः 3 से 6 तक हैं
तथा उन्हीं के अंश क्रमशः 2 से 5 तक हैं। इनका 1 से भाग करने पर भाग तथा
उनके भागफल का योग करने पर कितना कुल धन होगा, बताओ।
अनुशीलन-यहाँ पूर्वोक्तानुसार-
1 ÷ 2/3 = 1 × 3/2, इसी प्रकार अन्य संख्याओं के भाग से प्राप्त संख्याओं का
योग → 3/2 + 4/3 + 5/4 + 6/5 = 317/60 = 5 17/60
भागमातृजातौ करणसूत्रम्
भागादीनां यस्यां सम्भूतिर्भवति भागमाता सा।
तस्यां यथोक्तकरणैः पृथक्-पृथक् फलविनिष्पत्तिः¹।। २५।।
सुक्षेमा अनुवाद-जिस संख्या में भाग आदि अनेक संक्रियाएँ की जाती हैं,
वह भागमाता कही जाती है। उसमें पूर्वोक्त अनुसार अलग-अलग संक्रियाओं के
प्रयोग से परिणाम प्राप्त होते हैं।
अर्ध पादात् पादस्त्रिभागभागोऽर्धमर्धसंयुक्तम्।
त्र्यंशोऽर्धेन विहीनः समासतः किं फलं भवति।। २०।।
१. तुल. पाटी-गणित सू. 42, ग.सा.सं. 3.138