त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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अथवा 7/2 + 7/8 = (28+7)/8 = 35/8
सम्पूर्ण प्रश्न के हल के लिये उसे अंकगणितीय भाषा में प्रस्तुत करते हैं-
7ᵃ/2_b + 7/2 × 1ᶜ/4_d + { 1ᶜ/6_d ( 7/2 + 7/2 × 1/4 ) } + 1ᵃ/2_b + 1/2 × 1ᶜ/3_d + { 1ᶜ/4_d ( 1/2 + 1/2 × 1/3 ) }
पूर्वोक्त सूत्रानुसार-
7 (4+1) (6+1) / (2×4×6) + (3+1) (4+1) / (2×3×4)
= 245/48 + 5/6 = (245+40)/48 = 285/48 = 95/16 = 5 15/16
अथवा
7/2 + 7/8 + { 1/6 ( 7/2 + 7/8 ) } + 1/2 + 1/6 + { 1/4 ( 1/2 + 1/6 ) }
⇒ 35/8 + ( 1/6 × 35/8 ) + 2/3 + ( 1/4 × 2/3 )
= 35/8 + 35/48 + 2/3 + 1/6
= 285/48 = 95/16 = 5 15/16
प्रभागजातौ सूत्रम्
रूपे छेदेन हते छेदगमो भवति भागभागविधिः।१।
सुक्षेमा अनुवाद-रूप या पूर्ण राशि का किसी भिन्न संख्या से भाग करने
के लिये रूप का छेद या हरके साथ गुणन करने पर उसका छेदगम अर्थात् उसके
छेद का विनाश हो जाता है तथा अंश छेद बन जाता है²। यह भागभाग विधि होती है।
अनुशीलन-यहाँ भिन्न संख्याओं के भाग का प्रकार बताया है। इसके लिये
भिन्न संख्या के हर को रूप या पूर्ण राशि से गुणन करना चाहिये तथा अंश को
हर बना लेना चाहिये। इस प्रकार यह परिणाम प्राप्त होता है-
a ÷ b/c = ac/b
उदाहरणम्
षड्भागभागो दशभागभागस्त्रिभागभागश्च नवांशभागः।
जानासि चेद् ब्रूहि सखे विचिन्त्य द्विभागभागश्च धनं किमैक्यम्॥ १८॥
१. तुल. ब्रा.स्फु.सि 12.9, पाटी-गणित सू. 38, ग.सा.सं. 3.99, म.सि. 15.19
२. यस्य भागेन भागस्तस्मिन् रूपे भागसम्बन्धिना छेदेन हते तस्य छेदस्य गमो विनाशः। अंश
इदानीं छेदो जातः, रूपराशिश्चांशः - पाटी-गणित सूत्र 38 पर व्याख्या