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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 63, कुल 208 में से

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पृष्ठ 63

त्रिशतिका 35
न्यासः 1 5 8
½ ¼ ⅓ लब्धं यथाक्रमं धनं ३/२ २१/४ २५/३ योगे कृते जातं 15
────
¹/₁₂ ।। .
सुक्षेमा अनुवाद-आधे से सहित 1 या 1½, चौथाई सहित 5 या 5¼, तिहाई
सहित 8 या 8⅓ का योग कुल कितना धन होता है।
यहाँ सूत्रानुसार-
1½ = ३/२, 5¼ = २१/४, 8⅓ = २५/३
३/२ + २१/४ + २५/३ = 36+126+200 / 24 = ³⁶²⁄₂₄ = 15¹/₁₂
अथवा ल.स.प. लेने पर ⇒ 18+63+100 / 12 = ¹⁸¹⁄₁₂ = 15¹/₁₂
द्वितीयसूत्रे उदाहरणम्
सार्धं रूपत्रितयस्य पादसहितं स्वषष्ठसंमिश्रम्।
अर्धं स्वत्र्यंशयुतं स्वपादयुक्तं च किं योगे।। १७।।
न्यासः 3
─
½ ½ लब्धं रूपाणि 5 भागाश्च ¹⁵⁄₁₆ इति भागानुबन्ध जातिः।
── ──
¼ ⅓
── ──
⅙ ¼
सुक्षेमा अनुवाद-आधे के साथ 3 संख्या या ⁷/₂ तथा इसी संख्या से युक्त
इसका ¼ तथा इस योगफल से प्राप्त संख्या का ⅙ उस पूर्व संख्या से युक्त हैं। इस
योगफल में आधा या ½ उस आधे के तीसरे हिस्से या ⅓ युक्त है तथा इस योगफल
से प्राप्त संख्या का ¼ भी इसमें युक्त है। कुल योगफल क्या है।
अनुशीलन-यहाँ पहले प्रश्न के प्रथम अंश को उपपत्ति के साथ हल करते
हैं-
7ᵃ 7 1ᶜ
─── + ─── × ─── = (⁷/₂×⁴/₄) + (⁷/₂×¹/₄) ⇒ ⁷/₂ (⁴/₄ + ¹/₄)
2ᵦ 2 4_d
⇒ 7 (4+1) / (2×4) = 7×5 / 8 = ³⁵⁄₈