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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 62, कुल 208 में से

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34 त्रिशतिका
अधरस्थ हर संख्या (b) का दूसरे छेद या हर (d) के साथ गुणन के
पश्चात् ऊर्ध्व या प्रथम अंश (a) का दूसरे छोटे अंश (c) तथा हर (d) के जोड़
के साथ गुणन करने से भी भागानुबन्ध जाति प्राप्त होती है।
अनुशीलन-यहाँ प्रथम सूत्र में पूर्ण संख्या का भिन्न संख्या के जोड़ की
विधि बताई है। इसके अनुसार-
a + b/c = (c×a+b) / c
इस प्रकार प्रत्येक को भिन्न संख्या का रूप देकर योग की पूर्वोक्त विधि
से ऐसी सभी संख्याओं का योग हो सकता है।
द्वितीय सूत्र में किसी भिन्न संख्या में उसी भिन्न संख्या के किसी हिस्से के
जोड़ की विधि बताई है। इसे भागानुबन्ध (fractional increase) का नाम दिया
गया है। इसके अनुसार हम यह सूत्र प्राप्त करते हैं-
a/b ± a/b × c/d = a (d±c) / bd
इस सूत्र की उपपत्ति इस प्रकार है-
a/b ± a/b × c/d = (a×1 / b) ± (a×c / bd)
⇒ a/b (1 ± c/d) वितरण गुण के अनुसार
⇒ a (d±c) / bd
पाटी-गणित श्लोक 40 में इसी रीति से भागापवाह (fractional de-
crease) की विधि बताई है। उसे सम्मिलित करने के लिये हमने प्रस्तुत सूत्र में
व्यवकलन के चिह्न को भी अंकित किया है।
प्रथमसूत्रे उदाहरणम्
अर्धेन सहितमेकं पादेन युतानि पञ्च रूपाणि।
त्र्यंशसहितानि चाष्टौ समासतः किं धनं भवति¹॥ १६॥
१. तुल. पाटी-गणित उदा. 18