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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 61, कुल 208 में से

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पृष्ठ 61

त्रिशतिका 33
सुक्षेमा अनुवाद-प्रभागजाति में छेद या हर का तथा उसी प्रकार उसके
अंशों का भी गुणन होता है।
उदाहरणम्
काकिण्यर्ध तस्मात् तृतीयभागस्ततश्च पञ्चांशः।
योगे कियद् धनं वद यदि गणितविधिं विजानासि॥ १४॥
1/1 1/2 1/1 1/2 1/3 1/1 1/2 1/3 1/5 लब्धा वराटका: 14
सुक्षेमा अनुवाद-एक काकिणी का आधा या 1/2 उसका 1/3 तथा उसका 1/5
जोड़ने से कितना धन होता है, बताओ, यदि गणितविधि को जानते हो।
यहाँ विविध हिस्सों के हिस्से प्राप्त करने के लिये आपस में गुणन तथा
उसके पश्चात् जोड़ होगा। अतः –
(1/1×1/2) + (1/2×1/3) + (1/2×1/3×1/5) = 1/2 + 1/6 + 1/30 = 21/30 = 7/10 काकिणी
क्योंकि 20 वराटक की 1 काकिणी, अतः 20×7/10 = 140/10 = 14 वराटक
अन्यदुदाहरणम्
सार्धद्वयस्य पादो रूपत्रितयस्य षोडशोंऽशश्च।
अष्टांशस्य दशांशत्रितयं योगे किमाचक्ष्व॥ १५॥
न्यासः 5/2 1/4 3/1 1/16 1/8 3/10 लब्धं भागाः 68/80 इति प्रभागजातिः।
सुक्षेमा अनुवाद-आधा सहित 2 अर्थात् 2 1/2 का एक चौथाई या 1/4 तथा 3
का सोलहवाँ अंश या 1/16 तथा 1/8 का 3/10 के साथ योग क्या होगा, बताओ।
यहाँ पूर्वोक्तानुसार–
(5/2×1/4) + (3/1×1/16) + (1/8×3/10) = 68/80 = 17/20
भागानुबन्धजातौ सूत्रम्
भागानुबन्धजातौ रूपगुणच्छेदसंगुणः सांशः।
अथवान्यत् सूत्रम्
अधरहरच्छेदवधोऽधोंशयुतहरघ्न ऊर्ध्वांशः¹॥ २४॥
सुक्षेमा अनुवाद-भागानुबन्ध जाति में रूप या पूर्ण संख्या (a) से गुणित हर
(c) का अंश (b) के साथ जोड़ होता है।
१. अधरघ्नोर्ध्वहरेऽधोंशयुतहरघ्न आद्यंशः - पाटी-गणित सूत्र 39
तथा तुल. ब्रा.स्फु.सि. 12.9। ग.सा.सं. 3.113, म.सि. 15.11, लीलावती।