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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 59, कुल 208 में से

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पृष्ठ 59

त्रिशतिका 31
उदाहरणम्
सप्तानां सार्धानां पञ्चदशानां च पादयुक्तानाम्।
पादस्य त्र्यंशस्य च कथय घनं यदि विजानासि।। १२।।
न्यासः 15/2 61/4 1/4 1/3 लब्धा यथाक्रमं घना 3375/8 226981/64 1/64 1/27
सुक्षेमा अनुवाद-आधा सहित 6 या 6½, चौथाई से युक्त 15 या 15¼ तथा
एक चौथाई या ¼, एक तिहाई ⅓ का घन बताओ, यदि जानते हो।
यहाँ पूर्वोक्तानुसार-
7½ = 15/2 = (15×15×15)/(2×2×2) = 3375/8, 15¼ = 61/4 = (61×61×61)/(4×4×4) = 226981/64
¼ = 1/64, ⅓ = 1/27
घनमूले करण सूत्रम्
अंशघनमूलराशौ छेदनमूलोद्धृते मूलम्¹।
उदाहरणम्
प्राग्लब्धघनानां न्यासः 3375/8 226981/64 1/64 1/27
यथोक्तकरणेन लब्धानि घनमूलानि 15/2 61/4 1/4 1/3 इति घनमूलम्
भिन्न संख्याओं का घनमूल
सुक्षेमा अनुवाद-अंश की घनमूल राशि तथा छेदन या हर का घनमूल लेने
पर भिन्न संख्याओं का घनमूल प्राप्त होता है।
यहाँ पूर्वोक्तानुसार-
3375/8 = 15/2, 226981/64 = 61/4, 1/64 = 1/4, 1/27 = 1/3
कलासवर्णने सूत्रम्
छेदाभ्यामन्योन्यं हन्याच्छेदांशकौ समुच्चित्यै²।
भिन्न संख्याओं के योग आदि का सूत्र
सुक्षेमा अनुवाद-भिन्न संख्याओं के योग आदि के लिये हर संख्याओं का
एक दूसरे से गुणा कर लेना चाहिये। ताकि हर से अंश तदनुरूप बन जावें।
१. तुल. पाटी-गणित सू. 35, ग.सा.सं. 3.13, म.सि. 15.17, ग.ति. पृ. 26, लीलावती
भिन्नपरिकर्माष्टक श्लोक 5
२. अंशतः तुल. पाटी-गणित सू. 36, ब्रा.स्फु.सि. 12.2, म.सि. 15.13, ग.ति.पृ. 30, लीलावती