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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 58, कुल 208 में से

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पृष्ठ 58

30 त्रिशतिका
उदाहरणम्
सार्धद्वयस्य वर्गं पादयुतानां च कथय पञ्चानाम्।
अर्धस्य त्र्यंशस्य च यदि वर्गविधिं विजानासि¹।। १९।।
न्यासः 2 5 ½ ⅓ यथाक्रमं वर्गराशयः 25/4 441/16 1/4 1/9
½ ¼
सुक्षेमा अनुवाद-2 सहित आधा या 2½, चौथाई सहित 5 या 5¼, तथा
आधा या ½ तथा तिहाई या ⅓ का वर्ग बताओ, यदि इसकी विधि जानते हो।
अनुशीलन-यहाँ पूर्वोक्तानुसार-
2½ = 5/2 = 25/4, 5¼ = 21/4 = 441/16, ½ = 1/4, ⅓ = 1/9
भिन्नवर्गमूले सूत्रम्
अंशस्य वर्गमूले छेदनमूलोद्धृते मूलम्²।। २१।।
उदाहरणम्
प्राग्लब्धवर्णानां न्यासः 25/4 441/16 1/4 1/9 लब्धानि मूलानि 5/2 21/4 1/2 1/3
सुक्षेमा अनुवाद-अंश का वर्गमूल तथा इसी प्रकार छेद या हर का वर्गमूल
करने पर भिन्न संख्याओं का वर्गमूल प्राप्त होता है।
यहाँ पूर्वोक्तानुसार-
25/4 = 5/2, 441/16 = 21/4, 1/4 = 1/2, 1/9 = 1/3
घने करण-सूत्रम्
अंशस्य घनं विभजेच्छेदस्य घनेन घनफलं भवति³।
भिन्न संख्याओं का घन
सुक्षेमा अनुवाद-अंश का तथा छेद या हर का घन करने पर भिन्न
संख्याओं का घनफल प्राप्त होता है।
१. पाटी-गणित उदा. 12
२. तुल. ब्रा.स्फु.सि. 12.5। पाटी-गणित सू. 34, ग.सा.सं. 3.13, म.सि. 15.16, ग.कौ.पृ. 23
लीलावती भिन्नपरिकर्माष्टक श्लोक 5
३. तुल. पाटी-गणित सू. 35, ग.सा.सं. 3.13, म.सि. 15.17, ग.कौ.पृ. 25