त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिशतिका 27
सुक्षेमा अनुवाद- ¼ ⅓ ⅙ तथा ¹/₁₂ का योग बताओ तथा दल या अर्धसहित
2 अर्थात् 2½ या ⁵/₂ पाद या चौथाई रहित 3 अर्थात् 3-¼ = 2¾ या ¹¹/₄ तथा 6 या ⁶/₁
का जोड़ क्या होगा, बताओ।
अनुशीलन- यहाँ भिन्न संख्याओं के योग की विधि बताई है। इसके लिये
पहला नियम यह है कि हर संख्याओं को समान बनाएं। इसका प्रकार
'छेदाभ्यामन्योन्यं'---द्वारा व्याख्या में तथा आगे सूत्र 23 पृ. 27 में वर्णित है।
इसके अनुसार छेद या हर को एक दूसरे से गुणा करने पर सदृशच्छेद बनता है।
इसके पश्चात् प्रत्येक हर का इस सदृशच्छेद से या पूर्वोक्त गुणनफल से भाग देने
पर तथा भागफल को अंश से गुणित करके प्राप्त संख्याओं के योग से भिन्न
संख्याओं का योग होता है। जैसे पूर्वोक्त उदाहरण में हर संख्याओं का आपस में
गुणन तथा प्रत्येक हर का गुणनफल से भाग तथा भागफल का अंश से गुणन से-
¼ + ⅓ + ⅙ + ¹/₁₂ = (216+288+144+72) / 86
(720 ÷ 144) / (864 ÷ 144) = ⅚
हम जानते हैं कि ल.स.प. के उपयोग द्वारा इसे आसानी से हल किया जा
सकता है। सर्वप्रथम महावीराचार्य ने ल.स.प. का 'निरुद्ध' नाम देते हुए इसकी
विधि बताई है। पर श्रीधराचार्य तथा आगे भास्कराचार्य ने भी इसका उपयोग नहीं
किया। इसका उपयोग करने पर-
¼ + ⅓ + ⅙ + ¹/₁₂ = (3+4+2+1) / 12 = ¹⁰/₁₂ = ⅚
द्वितीय उदाहरण-
⁵/₂ + ¹¹/₄ + ⁶/₁ = (20+22+48) / 8 = ⁹⁰/₈ = ⁴⁵/₄ या ल.स.प के द्वारा (10+11+24) / 4 = ⁴⁵/₄ = 11¼
व्यवकलितसूत्रं परार्धम्
तुल्यच्छेदाद्यान्यराश्योरंशान्तरं कुर्यात्॥ १९॥
भिन्न राशियों को घटाने के लिये श्लोक का उत्तरार्ध-
१. तुल्यच्छेदायव्यराश्यो....पाटी-गणित सूत्र 32 तथा तुल.ब्रा.स्फु.सि. 12.2 म.सि. 15.14, ग.
ति.पृ. 18 सि.शे. 13.8, लीलावती भिन्नपरिकर्माष्टक श्लोक 4