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त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 41, कुल 208 में से

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पृष्ठ 41

त्रिशतिका 13
1+2---+100 के संकलित -1+2---+30 का संकलित
⇒ ((100-30) (100+30+1)) / 2 = 9170 / 2 = 4585
1+2---+100 के संकलित -1+2---+40 का संकलित
⇒ ((100-40) (100+40+1)) / 2 = 8460 / 2 = 4230
1+2---+100 के संकलित -1+2---+50 का संकलित
⇒ ((100-50) (100+50+1)) / 2 = 7550 / 2 = 3775
1+2---+100 के संकलित -1+2---+60 का संकलित
⇒ ((100-60) (100+60+1)) / 2 = 6440 / 2 = 3220
1+2---+100 के संकलित -1+2---+70 का संकलित
⇒ ((100-70) (100+70+1)) / 2 = 5130 / 2 = 2565
1+2---+100 के संकलित -1+2---+80 का संकलित
⇒ ((100-80) (100+80+1)) / 2 = 3620 / 2 = 1810
1+2---+100 के संकलित -1+2---+90 का संकलित
⇒ ((100-90) (100+90+1)) / 2 = 1910 / 2 = 955
1+2---+100 के संकलित -1+2---+100 का संकलित
⇒ ((100-100) (100+100+1)) / 2 = 0 / 2 = 0
प्रत्युत्पन्ने करणसूत्रमार्याचतुष्टयम्
विन्यस्याधो गुण्यं कपाटसन्धिक्रमेण गुणराशेः।
गुणयेद् विलोमगत्याऽनुलोममार्गेण वा क्रमशः॥ ५॥
उत्सार्योत्सार्य ततः कपाटसन्धिर्भवेदिदं करणम्।
तस्मिंस्तिष्ठति यस्मात् प्रत्युत्पन्नस्ततस्तत्स्थः¹॥ ६॥

१. तुल. पाटी-गणित सू. 18, 19