त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
पृष्ठ 40, कुल 208 में से
संदर्भ में पढ़ें12 त्रिशतिका
छोटी संख्या के संकलित का पद (m) = √2 (Sn-D) -m
उदाहरण ⇒ 10 = √2 (5050-4995) - 10
⇒ √110-10 = 10
स्पष्टतः यह पूर्वोक्त श्लोक 1 में वर्णित सूत्र √2S-n से सर्वथा अभिन्न है।
संक्रिया का परिणाम भी ठीक वही है। अतः इसके समतुल्य सूत्र भी यहाँ लागू
है। अतः यहाँ भी पूर्वोक्त श्लोक के अनुसार 'शेष-समम्' कहा है। इस प्रकार वहाँ
वर्णित उपपत्ति से इसकी उपपत्ति भी गतार्थ है।
उदाहरणानि
एकादिशान्तानां दशगुणितानां शतस्य संकलितात्।
एकाद्येकचयेन व्यवकलिते किं पृथक् शेषम्॥ २॥
न्यासः ।110 ।20 ।30 ।40 ।50 ।60 ।70 ।80 ।90 ।100।। शतस्य संकलितादस्मात्
5050 एकाद्येकोत्तराणामंकानां यथास्वपक्षविशोधनेन च लब्धं पृथक् व्यवकलितशेषम्
4995 ।4840 ।4585 ।4230 ।3775 ।3220 ।2565 ।1810 ।955 ।0 एतेभ्यो
व्यवकलितप