त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें4 त्रिशतिका
अनुशीलन-लीलावती में 2 यव = 1 गुञ्जा कहा है। यह गुञ्जा आधुनिक
'रत्ती' के समकक्ष है। कौटिल्य अर्थशास्त्र में ताँबे के 1 माष को 5 गुञ्जा या 5
रत्ती के बराबर बताया है¹। जैन ग्रन्थ अनुयोग द्वार सूत्र 132 में माषक = 5 रत्ती,
गुञ्जा = 1 रत्ती को सोना तौलने के उपयोग में बताया है। गुञ्जा या घूँघची के
लाल फल के कारण इसे 'रक्तिका' तथा प्राकृत में 'रत्ती' नाम दिया गया है।
प्राचीन काल में 'माष' तोल और सिक्के दोनों का नाम था। इससे भ्रम की
सम्भावना के कारण श्रीधराचार्य ने 'माष' सिक्के का नाम हटाकर उसके स्थान पर
'पण' कर दिया है। (देखें पूर्वोक्त चार्ट)। 'सुवर्ण' नामक सिक्के का संकेत
पाणिनि की अष्टाध्यायी तथा वार्तिक में प्राप्त होता है²। निरुक्त में सोने के लिये
'कल्याणवर्ण' का प्रयोग प्राप्त है³। त्रिशतिका उदा. 48 में सिक्के के लिये
'कल्याणसुवर्ण' नाम प्राप्त है तथा उदा. 42 में इसे 16 पण का बताया है।
कौटिल्य में इस सिक्के का भार ठीक यही अर्थात् 16×5=80 गुञ्जा बताया है।
चरक में भी 4 कर्ष का 1 पल बताया है।
आयतन के मात्रक
खार्येका षोडशभिर्द्रोणैश्चतुराढको भवेद् द्रोणः।
प्रस्थैश्चतुर्भिराढक एकः प्रस्थश्चतुः कुडवः⁴।। ६।।
सुक्षेमा अनुवाद-16 द्रोण की 1 खारी, 4 आढक का 1 द्रोण 4 प्रस्थ का
1 आढक तथा 4 कुडव का 1 प्रस्थ होता है।
अनुशीलन-इसके अनुसार 1/16 खारी = 1 द्रोण, 1/4 द्रोण = 1 आढक,
1/4 आढक = 1 प्रस्थ, 1/4 प्रस्थ = 1 कुडव सिद्ध होता है।
अष्टाध्यायी में खारी का वर्णन प्राप्त है⁵। पतञ्जलि ने महाभाष्य में द्रोण को
खारी का हिस्सा मानते हुए उदाहरण प्रस्तुत किया है⁶। इस नाप की तोल के लिये
भी इन्हीं शब्दों का प्रयोग होता था। प्रस्तुत विवरण में आढक, प्रस्थ, कुडव की
तोल कौटिल्य अर्थशास्त्र 2.19 के समतुल्य है।
१. कौटिल्य अर्थशास्त्र 2.12
२. हिरण्यपरिमाणं धने (पा.सू. 6.2.55) द्वौ सुवर्णौ परिमाणमेव धनमस्य द्विसुवर्णधनः। अर्थात्
दो 'सुवर्ण' नामक सिक्कों की पूँजी वाला मनुष्य। सुवर्णशतमानयोरुपसंख्यानम्। पा.सू.
5.1.29 पर वार्तिक।
३. कल्याणवर्णस्येवास्य रूपम्। - निरुक्त 2.3।। 'कल्याणवर्ण सुवर्ण' तदेव यस्य रूपं स
कल्याणवर्णरूपः - उक्त पर, दुर्गाचार्य।
४. तुल. पाटी गणित सू. 11 गणितसारसंग्रह 1.36-37 लीलावती परिभाषा श्लोक 8
५. खार्या ईकन् (पा.सू. 5.1.33)
६. अधिको द्रोणः खार्याम् - पा.सू. 5.2.73 पर महाभाष्य तथा 2, 3, 9 पर काशिका।