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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 33, कुल 208 में से

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पृष्ठ 33

त्रिशतिका 5
दूरियों के मात्रक
हस्तोऽङ्गुलविंशत्या चतुरन्वितया चतुःकरो दण्डः।
तद् द्वि सहस्रं क्रोशो योजनमेकं चतुःक्रोशम्१॥ ७॥
सुक्षेमा अनुवाद-4 सहित 20 अर्थात् 24 अंगुल का 1 हस्त, 4 हस्त का
1 दण्ड, 2 हजार दण्ड का 1 क्रोश, तथा 4 क्रोश का 1 योजन होता है।
अनुशीलन-लीलावती में 8 यवोदर का 1 अंगुल बताया है। कौटिल्य
अर्थशास्त्र 2.20 में भी ऐसा ही वर्णन है। इस प्रकार पौन इंच के बराबर 1 अंगुल
तथा 18 इंच के बराबर 1 हस्त होता था। भारत में हाथ से नापने की परम्परा होने
से 'हस्त' नाम दिया गया है। यूरोप में पैर से नापने के कारण पैर का वाचक foot
शब्द नाप के लिये प्रचलित हुआ। 3 फुट का 1 गज होता है। क्योंकि 16 अंगुल
का 1 फुट तथा 24 अंगुल या डेढ़ फुट का 1 हस्त है। अतः 2 हस्त 1 गज के
बराबर है। इस विवरण के अनुसार 2000×4 = 8000 हस्त या 4000 गज का
1 क्रोश होता है। योजन का वर्णन अष्टाध्यायी में भी प्राप्त है। ।4 क्रोश का 1
योजन सर्वत्र मान्य है।
काल के मात्रक
भवति घटीनां षष्ट्याहोरात्रं तैस्त्रिसंगुणैर्दशभिः।
मासो द्वादशभिस्तैर्वर्ष गणितेऽत्र परिभाषा२॥ ८॥
सुक्षेमा अनुवाद-60 घटी का 1 अहोरात्र, 3×10 = 30 अहोरात्र का 1
मास, 12 मास का 1 वर्ष। यही इस गणित में इनकी परिभाषा है।
अनुशीलन-मास, वर्ष की यह प्राचीन काल से प्रचलित परिभाषा दी गई
है। सूर्य सिद्धान्त 1.12 में घटी के लिये नाडी का प्रयोग है। वहाँ 60 विनाडी की
एक नाडी तथा 60 नाडी का एक अहोरात्र कहा है। (षड्भिः प्राणैर्विनाडी स्यात्
तत्षष्ट्या नाडिका स्मृता। नाडीषष्ट्या तु नाक्षत्रमहोरात्रं प्रकीर्तितम्।) आधुनिक युग
में 24×60 = 1440 मिनट का एक अहोरात्र माना जाता है। इस दृष्टि से प्राचीन
नाडी या घटी 24 मिनट की होती है। इस प्रकार की 60 घटी का 1 अहोरात्र सिद्ध
होता है।
१. तुल. पाटी गणित सू. 12 ग.सा.सं. 1.29-31 ग.कौ. पृ. 2-3
२. तुल. पाटी-गणित सू. 13