त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिशतिका 173
(volume of right circular cone)
क्षेत्रफलं वेधगुणं समखातं फलं त्रिभिः सूच्याः।-ब्रा.स्फु.सि. 12.44
समभुवि विकीर्णराशेः परिधिषडंशस्य यो भवेद् वर्गः।
सोऽभ्युदयहतो गणितं घनहस्तेऽवस्थितिः खार्याः।- त्रिशतिका सूत्र 61, पृ.
153
त्रिशतिका से तुल.-भवति परिधिषष्ठे वर्गिते वेधनिघ्ने घनगणितकराः
स्युर्मागधास्ताश्च खार्यः - लीलावती, राशिव्यवहार श्लोक 15, पृ. 314
ब्रा.स्फु.सि. से तुल.⇒ समखातफलत्र्यंशः सूचीखाते फलं भवति। -लीलावती,
खातव्यवहार, श्लोक 3, पृ. 305
चतुरस्र = I. वर्ग या आयत का क्षेत्रफल (area of the square or
rectangle)
वर्गः समचतुरस्रः फलं च सदृशद्वयस्य संवर्गः- आर्यभटीय गणितपाद 1.3
समचतुरस्रायतयोर्भुजकोटिहतिः प्रजायते गणितम् -त्रिशतिका सूत्र 42, पृ.
110
समश्रुतौ तुल्यचतुर्भुजे च तथाऽऽयते तद्भुजकोटिघातः। -लीलावती, क्षेत्रव्यवहार
श्लोक 23, पृ. 255
II. समलम्ब चतुर्भुज का क्षेत्रफल (Area of a trapezium)
आयामगुणे पार्श्वे तद्योगहृते स्वपातरेखे ते। विस्तरयोगार्धगुणे ज्ञेयं क्षेत्रफलमायामे।
-आर्यभटीय, गणितपाद, श्लोक 8
चतुरस्रेष्वन्येषु च लम्बगुणं कुमुखयोगार्धम्। -त्रिशतिका श्लोक 42, पृ. 111
चतुर्भुजेऽन्यत्र समानलम्बे लम्बेन निघ्नं कुमुखैक्यखण्डम्। -लीलावती, क्षेत्र-
व्यवहार, श्लोक 23, पृ. 225
चय, प्रचय या उत्तर (Common difference)
पदहतफलं मुखोनं निरेकपददलहतं प्रचयः। -त्रिशतिका सूत्र 40, पृ. 105
द्विहतं संकलितधनं गच्छहतं द्विगुणितादिना रहितम्
विगतैकपदविभक्तं प्रचयस्स्यादिति विजानीहि।।
-गणितसारसंग्रह-परिकर्म श्लोक 2, पृ. 75
गच्छहृतं धनमादिविहीनं व्येकपदार्धहृतं च चयः स्यात्। -लीलावती, श्रेढी
व्यवहार, श्लोक 4, पृ. 153