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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 199, कुल 208 में से

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पृष्ठ 199

त्रिशतिका 171
गोलपाषाण-फल- गोले का आयतन (volume of the sphere)
तन्निजमूलेन हतं घनगोलफलं निरवशेषम् -आर्यभटीय, गणितपाद, 1.7
गोलव्यासघनार्धं स्वाष्टादशभागसंयुक्तं गणितम्।
घनहस्ता नवगुणिताश्चतुर्विभक्ता करा दृषदः।। त्रिशतिका सूत्र 56, पृ. 145
---एवं तदपि च फलं पृष्ठजं व्यासनिघ्नम्।
षड्भिर्भक्तं भवति नियतं गोलगर्भे घनाख्यम्।।-लीलावती, क्षेत्रव्यवहार, श्लोक
41, पृ. 281
घन (एक पद का) (cube)---
सदृशत्रयसंवर्गो घनः- आर्यभटीय गणित पाद 1.3
स्थाप्योऽन्त्यघनोऽन्त्यस्य कृतिस्त्रिगुणोत्तरसंगुणा च तत्प्रथमात्।
उत्तरकृतिरन्त्यगुणा त्रिगुणा चोत्तरघनश्च घनः।-ब्रा.स्फु.सि.
सर्वथा तुल. ⇒ स्थाप्योऽन्त्यघनोऽन्त्यकृतिः स्थानाधिक्यं त्रिपूर्वगुणिता च।
आद्यकृतिरन्त्यगुणिता त्रिगुणिता च घनस्तथाद्यस्य- त्रिशतिका सू. 14, पृ. 21
स्थाप्यो घनोऽन्त्यस्य ततोऽन्त्यवर्गः---आदि- लीलावती, अभिन्नपरिकर्माष्टक
श्लोक 11
घन (द्विपद का) (b = 1 मानते हुए)-
खैकादिचयेनान्त्ये त्र्यादिहते वा युतिः सैकै- त्रिशतिका सूत्र 15, पृ. 21
त्रिशतिका से विकसित तुल. सूत्र-खण्डाभ्यां वा हतो राशिस्त्रिघ्नः
खण्डघनैक्ययुक्। -लीलावती, अभिन्नपरिकर्माष्टक श्लोक 13 पृ. 29
घनमूल- (Cube root)
अघनाद् भजेद् द्वितीयात् त्रिगुणेन घनस्य मूलवर्गेण।
वर्गस्त्रिपूर्वगुणितः शोध्यः प्रथमाद् घनश्च घनात्।। -आर्यभटीय, गणितपाद
1.5
तुल.--- त्रिशतिका सूत्र 16, 17 पृ. 24
---लीलावती अभिन्न परिकर्माष्टक श्लोक 15, पृ. 33
घनफल (volume)
I. समखात का घनफल = घन का आयतन (volume of the cube)
क्षेत्रफलं वेधगुणं समखातफलम् - ब्रा.स्फु.सि. 12.44