त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिशतिका 169
परिशिष्ट नं. २
त्रिशतिका की तुलनीय गणितीय संक्रियाएँ
अन्त्य-धन- (last term)
इष्टं व्येकं दलितं सपूर्वम् उत्तरगुणम्- आर्यभटीय, गणित पाद 1.19
पदमेकहीनम् उत्तरगुणितं संयुक्तमादिनान्त्यधनम्- ब्रा.स्फु.सि. 12.17
व्येकपदोत्तरघाते सादावन्त्यं धनं तदादियुतम्- त्रिशतिका सूत्र 39, पृ. 99
चयगुणितैकोनपदं सादि अन्त्यधनम्- गणितसार संग्रह, संकलित-परिकर्म,
श्लोक 64
व्येकपदघ्नचयो मुखयुक् स्यादन्त्यधनम्- लीलावती, श्रेढ़ी व्यवहार श्लोक
3, पृ. 151
अवधा- चतुर्भुज या त्रिभुज में शीर्ष लम्ब से विभाजन द्वारा प्राप्त शेष एक
आधार भुजा (segment of the base)
एतां कर्णयोरनयोः पृथक् वर्गाभ्यां विशोध्य शेषयोर्मूले भुजोऽवधा च-
त्रिशतिका सूत्र 50 पर व्याख्या, पृ. 131
यल्लम्बलम्बाश्रितबाहुवर्गविश्लेषमूलं कथिताऽवधा सा- लीलावती, क्षेत्रव्यवहार
श्लोक 25, पृ. 230
आदिधन- (first term)
आदिः पदहृतगणितं निरेकगच्छघ्नचयदलेनोनिम्-त्रिशतिका सूत्र 40, पृ. 103
सर्वथा तुलनीय- प्रभवो गच्छाप्तधनं विगतेकपदार्धगुणितचयहीनम्- गणितसार
संग्रह, परिकर्म श्लोक 74
अन्य प्रकार ⇒ द्विगुणितसंकलितधनं गच्छहृतं रूपरहितगच्छेन।
ताडितचयेन रहितं द्वयेन सम्भाजितं प्रभवः- गणित सार संग्रह, परिकर्म
श्लोक 76
त्रिशतिका से तुल.- गच्छहृते गणिते वदनं स्यात् व्येकपदघ्नचयार्धविहीने।
-लीलावती, श्रेढ़ी व्यवहार, श्लोक 4, पृ. 152
कर्ण = अक्ष्णया रज्जु-बौधायन शुल्व सूत्र प्रोक्त शब्द। (Hypotenues)
यश्चैवं भुजावर्गः कोटीवर्गश्च कर्णवर्गः सः-आर्यभटीय, गणितपाद श्लोक
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