त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें168 त्रिशतिका
व्यास- (diameter)
सूत्रोक्ताद् व्यासार्धाद् व्यासार्ध मण्डलस्यैतत्-आपस्तम्बीय शुल्ब परिशिष्ट
The shulva Sutras पृ. 83
व्यास व्यासार्धकृती परिधिफले व्यावहारिके त्रिगुणे- ब्रा.स्फु.सि. 12.40
त्रिशतिका सूत्र 45, पृ. 123
व्यासे भनन्दाग्निहते विभक्ते खबाण-सूर्यैः परिधिः स सूक्ष्मः।
-लीलावती क्षेत्रव्यवहार श्लोक 40 पृ. 275
शर- जीवा के मध्य बिन्दु से वृत्त के किसी बिन्दु को स्पर्श करने वाला
लम्ब -बाण (arrow)
वृत्ते शरोनगुणितात् व्यासाच्चतुराहतात् पदं जीवा। -ब्रा.स्फु.सि. 12.41
त्रिशतिका सूत्र- 47, पृ. 126
ज्याव्यासयोगान्तरघातमूलं व्यासस्तदूनो दलितः शरः स्यात्।
-लीलावती क्षेत्रव्यवहार श्लोक 43, पृ. 290
समक्रय- अनुपात के आधार पर क्रय पर संक्रियाएँ।
त्रिशतिका सूत्र 38, पृ. 94
लीलावती, मिश्रकव्यवहार में क्रयविक्रय सूत्र 14, पृ. 130 के अन्तर्गत
श्रेढी व्यवहार- क्रमिक संख्याओं का गणित।
ऋग्वैदिक 'श्रेणी' शब्द का प्राकृत-रूप।
ब्रा.स्फु.सि. 12.1 में 8 व्यवहारों में से एक।
त्रिशतिका सूत्र 39, पृ. 99
महावीराचार्य के गणित-सार संग्रह तथा भास्कराचार्य के लीलावती आदि में
विशद वर्णन।
हर = जिस संख्या से हरण या भाग दिया जावे (denominator of a
fraction)
पर्याय हार, छेद, भाजक-आदि।
त्रिशतिका सूत्र 20, पृ. 29