त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिशतिका 167
चतुर्भुजेऽन्यत्र समानलम्बे लम्बेन निघ्नं कुमुखैक्यखण्डम्।
-लीलावती श्लोक 23, पृ. 225
वर्गमूल- (square-root)
भारं हरेदवर्गाद् द्विगुणेन वर्गमूलेन। वर्गाद् वर्गे शुद्धे लब्धं स्थानान्तरे
मूलम्-आर्यभटीय-गणित पाद 1.4
ब्रा.स्फु.सि. 12.1 में 20 परिकर्म में से एक
त्रिशतिका सूत्र 12-13, पृ. 20
त्यक्त्वाऽन्त्याद् विषमात् कृतिं द्विगुणयेन्मूलं समे तद्धृते-लीलावती, वर्गमूलविधि
श्लोक 1 पृ. 27
वल्ली-सवर्णन- संख्याओं को समान मात्रक में बनाने की विधि। त्रिशतिका
सूत्र 26, पृ. 38
विषम-क्रय-
त्रिशतिका श्लोक 38, पृ. 94
लीलावती, मिश्रक व्यवहार में क्रयविक्रय सूत्र 14 पृ. 130 के अन्तर्गत
विष्कम्भ- व्यास (diameter)
विष्कम्भान्तयोः शंकू निहन्यात्-बौधायन शुल्बसूत्र 1.23
अयुतद्वय-विष्कम्भस्यासन्नो वृत्त-परिणाहः- आर्यभटीय, गणितपाद- 1.10
त्रिशतिका श्लोक उदा. 85, पृ. 124
वेध = गहराई (depth)
क्षेत्रफलं वेधगुणं समखातफलं हतं त्रिभिः सूच्याः। -ब्रा.स्फु.सि. 12.44
त्रिशतिका श्लोक 52, 53 पृ. 137
व्यवकलित-शेष = बड़ी संख्या के संकलित में से छोटी संख्या के
संकलित को घटाने का सूत्र।
त्रिशतिका, सूत्र 3 पृ. 10
व्यस्त-त्रैराशिक- तीन राशियों के आधार पर व्युत्क्रमानुपात का नियम
(Inverse proportion based on the rule of three)
ब्रा.स्फु.सि. 12.1 में 20 परिकर्मों में से एक
त्रिशतिका सूत्र 30, पृ. 57