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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 194, कुल 208 में से

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पृष्ठ 194

166 त्रिशतिका
मिश्र ( धन )- ब्याज सम्मिलित मूलधन (whole amount)
कालप्रमाणघातः परकालहतो द्विधाऽऽद्यमिश्रवधात्। -ब्रा.स्फु.सि. 22.15
त्रिशतिका सूत्र 33, पृ. 78
प्रमाणकालेन हतं प्रमाणं विमिश्रकालेन हतं फलं च।
-लीलावती मिश्रकव्यवहारः श्लोक 11 पृ. 117
मिश्रक व्यवहार- मूलधन तथा ब्याज की विधि (Method for simple
interest and principal amount)
ब्रा.स्फु.सि. 12.1 के 8 व्यवहारों में से एक
त्रिशतिका सूत्र 33, पृ. 78
लीलावती, मिश्रक व्यवहार श्लोक 11, पृ. 117 तथा आगे
मुख- आधार के समानान्तर भुजा (Top side parallel to the base)
मुखतलयुतिदल-गणितं---ब्रा.स्फु.सि. 12.45
त्रिशतिका सूत्र 42, पृ. 111 पृ. चतुर्भुजेऽन्यत्र समानलम्बे लम्बेन निघ्नं
कुमुखैक्यखण्डम्- लीलावती, श्लोक 23
मूलधन (Principal amount) स्वफलयुतरूपभक्तं मूलफलैक्यं भवति
मूलम्। -ब्रा.स्फु.सि. 12.14
त्रिशतिका सूत्र 34, पृ. 82
स्वयोग भक्ते च पृथक् स्थिते ते मिश्राहते मूलकलान्तरे स्तः - लीलावती,
मिश्रक व्यवहार, श्लोक 11, पृ. 117
राशि-व्यवहार- धान के ढेर का घन-गणित (volume of a heap of
grain)
ब्रा.स्फु.सि. 12.1 के 8 व्यवहारों में से एक
त्रिशतिका सूत्र 61 पर पृ. 153
लीलावती-राशि व्यवहार श्लोक 1 से, पृ. 314
लम्ब = शीर्षलम्ब (perpendicular)
अवलम्बक - अविषम-पार्श्वभुजगुणः कर्णो द्विगुणावलम्बकविभक्तः।
-ब्रा.स्फु.सि. 12.26
त्रिशतिका सूत्र 43, पृ. 115