त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिशातिका 165
त्रिशातिका सूत्र 24, पृ. 36
भाग-माता- पूर्ण तथा अपूर्ण संख्याओं के साथ भाग, योग आदि अनेक
संक्रियाएँ।
कला सवर्णन के 6 प्रकारों में से एक
ब्रा.स्फु.सि. के 20 परिकर्मों में से एक
त्रिशातिका सूत्र 25, पृ. 37
भागानुबन्ध-विधि- भिन्न संख्याओं का योग (fractional increase)
कला-सवर्णन के 6 प्रकारों में से एक
ब्रा.स्फु.सि. के 20 परिकर्मों में से एक
त्रिशातिका सूत्र 18, पृ. 26
लीलावती-भिन्न परिकर्माष्टक श्लोक 2, पृ. 38
भागापवाह- भिन्न संख्याओं का व्यवकलन (fractional decrease)
कला-सवर्णन के 6 प्रकारों में से एक
ब्रा.स्फु.सि. के 20 परिकर्मों में से एक
त्रिशातिका सूत्र 19, पृ. 27
लीलावती, भिन्न-परिकर्माष्टक, श्लोक 2, पृ. 38
भाण्ड प्रतिभाण्डक- वस्तु-विनिमय-विधि (Rules for barter)
प्रागमूल्यव्यत्यासो भाण्डप्रतिभाण्डकेऽन्यदुक्तसमम्
परिकर्माण्यष्टानां व्यवहाराणामभिहितानि- ब्रा.स्फु.सि. 12.13
20 परिकर्मों में से एक
त्रिशातिका सूत्र 32, पृ. 75
तथैव भाण्डप्रतिभाण्डकेऽपि विधिर्विपर्यस्य हरांश्च मूल्ये।
-लीलावती-पञ्चराश्यादिक, श्लोक 10, पृ. 111
भाव्यक- कोई भी नाम जैसे क, ख (Any term like x, y)
भावितक-भावितकरूपगुणना साव्यक्तवधेष्टभाजितेष्टाप्त्योः।
-ब्रा.स्फु.सि. 18.60
त्रिशातिका सूत्र 34, पृ. 82