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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 192, कुल 208 में से

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पृष्ठ 192

164 त्रिशतिका
प्रत्युत्पन्न– गुणन (multiplication)
ब्रा.स्फु.सि 12.1 में 20 परिकर्म में से एक। इसकी विधि 12.3 में।
त्रिशतिका श्लोक 6, पृ. 13
प्रभाग जाति– भिन्न संख्याओं के भाग का भाग (compound fraction)
कला-सवर्णन के 6 प्रकारों में से एक
त्रिशतिका सूत्र 23, पृ. 32
लवा लवघ्नाश्च हरा हरघ्ना भागप्रभागेषु सवर्णनं स्यात्।
-लीलावती भिन्न-परिकर्माष्टक श्लोक 2 पृ. 37
प्रमाण– त्रैराशिक की प्रथम राशि (First quantity of त्रैराशिक scale)
लब्धं प्रमाणभजितं तस्मादिच्छाफलमिदं स्यात्।। आर्यभटीय 1.26
त्रिशतिका सूत्र 29, पृ. 49
प्रमाणमिच्छा च समानजाती आद्यन्तयोस्तत् फलमन्यजातिः। –लीलावती त्रैराशिक,
श्लोक 7, पृ. 100
प्रमाण-फल– त्रैराशिक की द्वितीय राशि (second quantity of त्रैराशिक
scale)
आर्यभटीय - द्र. 'प्रमाण'
त्रिशतिका सूत्र 29, पृ. 49
लीलावती - द्र. 'प्रमाण'
बाहु = भुज (base)
बाहुस्त्वजधा-त्रिशतिका सूत्र 50, पृ. 131
भाग-जाति– भिन्न संख्याओं का भाग (simple fraction)
कला-सवर्णन के 6 प्रकारों में से एक
ब्रा.स्फु.सि. 20 परिकर्म में से एक
त्रिशतिका सूत्र 23, पृ. 32
लीलावती - भिन्नपरिकर्माष्टक श्लोक 1, पृ. 35
भाग-भाग-विधि–पूर्ण संख्या का भिन्न संख्या के साथ भाग।
कला-सवर्णन के 6 प्रकारों में से एक।
ब्रा.स्फु.सि के 20 परिकर्मों में से एक