त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें160 त्रिशतिका
परिशिष्ट नं.1
त्रिशतिका के विशिष्ट गणितीय शब्द
आयत (rectangle)—
प्राचीन प्रयोग- ‘आयत चतुरस्र’ (ऐ. ब्रा. 5.5)
इस अर्थ में केवल ‘आयत’ का प्रयोग-
समचतुरस्रायतयोर्भुजकोटिहतिः प्रजायते गणितम्-त्रिशतिका सू. 42 पृ. 110
स्पष्टतः यहाँ ‘आयत’ शब्द समचतुरस्र का विपरीत ‘विषम चतुर्भुज’ का
वाचक है। इस प्रकार जिस चतुर्भुज की आसन्न भुजाएँ नहीं, अपितु आमने सामने
की भुजाँ बराबर हों, वह आयत है।
समश्रुतौ तुल्यचतुर्भुजे च तथायते तद् भुजकोटिघातः-लीलावती पृ. 225
आयाम = लम्बाई (length)
प्राग्वंशः षोडशप्रक्रमायामः बौ. शु. सू. 1.88
-त्रिशतिका - उदा. 83 इत्यादि, पृ. 121
इच्छा- त्रैराशिक की तृतीय राशि (Third quantity of त्रैराशिक - scale)
त्रैराशिक-फल-राशि तमथेच्छाराशिना हतं कृत्वा।
लब्धं प्रमाणभजितं तस्मादिच्छाफलमिदं स्यात् - आर्यभटीय 1.26
त्रिशतिका सू. 29 पृ. 49
प्रमाणमिच्छा च समानजातिः आद्यन्तयोस्तत् फलमन्यजातिः - लीलावती
त्रैराशिक श्लोक 7 पृ. 100
एकपत्रीकरण- ब्याज का विवरण (chart of interest)
त्रिशतिका सू. 35, पृ. 84
कपाट-सन्धि- गुणन की एक विधि (A method of multiplication)
त्रिशतिका सू. 5, पृ. 13
कर्ण- (hypotenues) कर्णस्तु पार्श्वभुजः - त्रिशतिका सूत्र 50, पृ. 131
कला-सवर्णन- भिन्न संख्याओं पर संक्रियाएँ
परिकम्मं ववहारो रज्जु-रासी कलासवन्नेय।
जावन्तावति वग्गो घनो ततह वग्गवग्गो विकप्पोत-स्थानांग सूत्र 747