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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 186, कुल 208 में से

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पृष्ठ 186

158 त्रिशतिका
किया गया है। यह सूत्र इस प्रकार है-
दिन मान = शंकु का दैर्घ्य / [2 (शंकु का दैर्घ्य + उससे निर्मित छाया)]
श्लोक के द्वितीय चरण में कहा गया है कि इससे विपरीत क्रिया से दिन
मान ज्ञात होने पर उसके आधार पर काष्ठ की छाया जानी जा सकती है। इससे
यह सूत्र प्राप्त होता है-
छाया का मान = [(शंकु का दैर्घ्य / दिन-शेष-मान) -- 2 शंकु का दैर्घ्य] / 2
पूर्वार्धोदाहरणम्
द्वादशांगुलदैर्घ्यस्य शंकोरष्टांगुलस्य वा।
छाया पश्चिमतो दृष्टा त्रिगुणाह्नः कियद् गतम्।। 106।।
12। 8 शंकोश्छाया यथाक्रमम् 36। 24। लब्धं दिनगतशेषम् 1/8। पूर्वापरच्छायामेवं
दिनसिद्धिः।।
सुक्षेमा अनुवाद-12 अंगुल या 8 अंगुल ऊँचे शंकु या सम ऊर्ध्व स्थित
काष्ठ की तिगुनी छाया पश्चिम की ओर पड़ रही है। तो बताओ कितना दिन बीत
गया।
अनुशीलन-यहाँ पूर्वोक्त सूत्रानुसार-
12 / [2(12 + 36)] = 12/96 = 1/8, 8 / [2(8 + 24)] = 8/64 = 1/8
छाया पश्चिम की ओर पड़ने से स्पष्ट है कि प्रातः काल का समय है। यहाँ
सूत्रानुसार 1/8 दिन बीतने का अर्थ 1- 1/8 = 7/8 दिन शेष है। यदि सूर्योदय प्रातः 6
बजे तथा सूर्यास्त सायं 6 बजे हो तथा इस प्रकार 12 घण्टे का दिन हो तो शेष
दिन = 12 × 7/8 = 21/2 = 10½ घण्टा है। अर्थात् प्रातःकाल 7.30 का समय है।
उत्तरार्धोदाहरणम्
अष्टभागदिनस्यैते शेषे चापि निगद्यताम्।
शंकोः पूर्वोक्तयोरेव छायां पूर्वा