त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
पृष्ठ 183, कुल 208 में से
संदर्भ में पढ़ेंत्रिशतिका 155
अन्यदुदाहरणम्
अपवरको धान्यभृतः समाष्टकरबाहुको दशोच्छ्रायः।
का तत्र धान्य-संख्या वदतु भवान् यदि विजानाति॥ 103॥
न्यासः [चित्र: घनाभ, लम्बाई = 8, चौड़ाई = 8, ऊँचाई = 10]
लब्धं गणितं हस्ताः 640। एतावत्य एव मागधा खार्यः।
सुक्षेमा अनुवाद-कोई धान का कुठार, जिसकी लम्बाई तथा चौड़ाई 8-8
हाथ तथा ऊँचाई 10 हाथ है, वह कितने घन हस्त होगा तथा उसमें कितने मागध
खारी धान्य समाएगा। यदि जान सको तो बताओ।
अनुशीलन-यहाँ समतल पृष्ठ में चतुष्कोण कुठार के घनफल का उदाहरण
दिया गया है। इसके सूत्र को 57 श्लोक तथा अग्रिम सूत्र में भी बताया गया है।
इसके अनुसार--
8 × 8 × 10 = 640 घन हस्त अथवा 640 मागध खारी
अन्यत्र सूत्रम्
प्राग्वत् क्षेत्रस्य फलं चतुरस्रत्र्यस्रचापवृत्तेषु।
तुल्योदयेन गुणितं संख्यानं भवति धान्यस्य॥ 63॥
एव त्र्यस्रादिस्थानेष्वपि घनफलाद् धान्यसंख्यानं कथयेत्।
सुक्षेमा अनुवाद-चतुरस्र या त्र्यस्र अर्थात् चतुर्भुज या त्रिभुज तथा चाप
वाले वृत्त के क्षेत्रफल को पहले ही बता दिया गया है। इस क्षेत्रफल को उदय या
ऊँचाई से गुणित करने पर इनका घनफल या आयतन तथा इस प्रकार खारी धान्य
की गणना प्राप्त होती है।
अनुशीलन-यह सूत्र तथा इसका उदाहरण पिछले श्लोक में वर्णित कर
दिया गया है।
भित्त्याश्चितादिराशिज्ञानाय सूत्रम्
द्विचतुःसप्त्यशहस्ते भित्यन्तरबाह्यकोणगतपरिधौ।
प्राग्वत् फलं भवेत् तत् स्वगुणहतं जायते गणितम्॥ 64॥
सुक्षेमा अनुवाद-कमरे की दीवाल के भीतर या भीतर के किसी कोने में