त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें154 त्रिशतिका
शंकु का आयतन = ⅓ × वृत्त का क्षेत्रफल × ऊँचाई।
स्पष्टतः यह आधुनिक सूत्र के समतुल्य है। श्लोक 57 में लम्ब वृत्तीय
बेलन आकार का आयतन = वृत्त का क्षेत्रफल × ऊँचाई यह सूत्र प्रदान किया है।
उसका अनुसरण करने पर-
शंकु का आयतन = ⅓ × लम्ब वृत्तीय बेलन का आयतन
भास्कराचार्य ने इसी रीति से इस सूत्र का उपयोग किया है। उन्होंने पहले
उपरिलिखित वृत्त का क्षेत्रफल प्राप्त किया। (वृत्तक्षेत्रे परिधिगुणित-व्यासपादः फलं
तत् - लीलावती-क्षेत्रव्यवहार श्लोक 41)। पुनः उस क्षेत्रफल को ऊँचाई से गुणन
करके वृत्तीय बेलन का घनफल या आयतन प्राप्त किया है। (क्षेत्रफलं सममेवं वेध
हतं घनफलं स्पष्टम् - लीलावती, खातव्यवहार, श्लोक 2)। इस घनफल को ⅓
से गुणा करके सूचीखात का घनफल या शंकु का आयतन बताया है। (समखातफल-
त्र्यंशः सूचीखाते फलं भवति। (लीलावती, खातव्यवहार श्लोक 3)
श्रीधराचार्य ने प्रस्तुत प्रसंग में सीधे शंकु का आयतन ज्ञात किया है।
उपरिलिखित विवरण से प्रकट है कि यह वृत्त के क्षेत्रफल, वृत्तीय बेलन के
आयतन के क्रम से इन सूत्रों को प्राप्त करना सम्भव है।
उदाहरणम्
षट्त्रिंशत् परिधाने राशौ धान्यस्य किं भवेद् गणितम्।
हस्तचतुष्काभ्युदये यदि वेत्सि तदुच्यतामाशु।। 102।।
न्यासः ④
इदं लब्धं घनहस्ताः 144। एतावत्य एव मागधाः खार्यः।।
सुक्षेमा अनुवाद-कोई ऐसा धान का ढेर जिसकी परिधान या परिधि 36
हाथ तथा अभ्युदय या ऊँचाई 4 हाथ है। उसका गणित या घन हस्त कितना होगा,
यदि जानते हो तो शीघ्र बताओ।
अनुशीलन-यह ढेर शंकु के आकार का है। अतः शंकु के पूर्वोक्त सूत्र को
समन्वित करने पर-
( ³⁶⁄₆ )² × 4 = 6 × 6 × 4 = 144 घन हस्त या मागध खारी