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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 181, कुल 208 में से

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पृष्ठ 181

त्रिशतिका 153
7 163/180 सभी पटरों का कुल वर्ग हस्त में क्षेत्रफल
राशिव्यवहारे सूत्रम्
समभुवि विकीर्णराशेः परिधिषडंशस्य यो भवेद् वर्गः।
सोऽभ्युदयहतो गणितं घनहस्तेऽवस्थितिः खार्याः॥ 61॥
मगधायामन्यत्र तु यावन्मात्रस्य घनकरो भवति।
यद्यस्यावस्थानं तावन्मात्रस्य निर्देशः॥ 62॥
सुक्षेमा अनुवाद-समपृष्ठ वाली जमीन पर फैलाई गई धान्य की राशि की
परिधि के छठे अंश का जो वर्ग हो, उसे अभ्युदय अर्थात् ऊँचाई से गुणित करने
पर घनहस्त प्राप्त होते हैं। मगध देश मे यह घन हस्त खारी का मान होता है। अन्य
देशों में जितने घन हस्त हों, उतने 'घन हस्त' के ही रूप में निर्देश होता है। यदि
वे खारी के मान के अनुरूप हों तो तदनुरूप, अन्यथा उससे भिन्न भी हो सकता
है।
अनुशीलन-इन श्लोकों में समतल धरती पर पड़े हुए धान के ढेर का मान
जानने का प्रकार बताया गया है। इस प्रकार का ढेर लगभग शंकु का आकार
धारण कर लेता है। अर्थात् सबसे ऊँचाई पर सूची सदृश सबसे कम, उसके
पश्चात् वृत्त में उसका क्षेत्रफल बढ़ता जाता है। ऐसी सूची की आकृति होने से इस
प्रकार के वृत्त के आयतन को 'सूचीघनफल' कहने की परम्परा है। इसे जानने के
लिये शंकु के घनफल या आयतन के सूत्र का उपयोग किया गया है। प्रस्तुत धान
के ढेर के घनफल का यह सूत्र शंकु के आयतन के सूत्र को उपलब्ध कराता है-
शंकु का घनफल या आयतन = (परिधि / 6)² × ऊँचाई
यह सूत्र π = 3 तथा इस प्रकार परिधि = 3 × व्यास मानकर विकसित है।
इस स्थिति में इस सूत्र से क्रमशः यह परिणाम प्राप्त करते हैं-
शंकु का आयतन = (परिधि / 6)² × ऊँचाई
(परिधि² × ऊँचाई) / 36 = (परिधि × 3 व्यास × ऊँचाई) / 36 = (परिधि × व्यास × ऊँचाई) / (3 × 4)
क्योंकि श्लोक 45 के सूत्र से यह परिणाम प्राप्त है कि वृत्त का क्षेत्रफल=
(परिधि × व्यास) / 4 अतः सिद्ध है कि-