त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें152 त्रिशतिका
100 : 6 :: 15 : x
100x = 15 × 6
x = 15/100 × 6 = 9/10
पुनरुदाहरणम्
वृत्तस्य खदिरदारोः करविस्तारस्य दशसु मार्गेषु।
तिर्यक्छेदे गणितं करात्मकं किं भवेत् कथय।। 101।।
न्यासः [वृत्तम्: व्यासः = 24]
मार्गाः 10 अत्र व्यासार्धवर्गवर्गादित्यादिना दशशतगुणनादिकर्मणा लब्धं क्षेत्रफलम्
455 9/25 एतन्मार्गगुणं षड्गुणचतुष्ककृत्या विभज्य लब्धं हस्ताः 7 163/180 पूर्ववदनुपातेन
करपत्रैकस्य च पाटने रूपभागाः 1423/3000 एवमन्यकाष्ठेष्वपि। इति काष्ठव्यवहारः।
सुक्षेमा अनुवाद-कोई वृत्ताकार खैर की लकड़ी, जिसका व्यास 1 हाथ या
24 अंगुल है तथा जिसे 10 मार्ग में चीरा गया है, उसका क्षेत्रफल तथा सभी पटरों
का वर्ग हस्त में गणित या क्षेत्रफल क्या होगा।
अनुशीलन-यहाँ पूर्वोक्त श्लोक 45 द्वारा वृत्त के क्षेत्रफल का मूल सूत्र-
√[10 (व्यास / 2)⁴]
√[10 (24/2)⁴] ⇒ √[10 × (12)⁴]
⇒ √207360 ⇒ 455 36/100
⇒ 455 9/25 वर्ग अंगुल लकड़ी का क्षेत्रफल
उक्त क्षेत्रफल वाले 10 पटरे प्राप्त किये गए हैं। अतः सभी पटरों का कुल
क्षेत्रफल-
(11384 × 10) / 25 = 113840 / 25 वर्ग अंगुल
इसका वर्ग हस्त प्राप्त करने के लिए 24 × 24 = 576 से भाग-
113840 / (25 × 576) = 113840 / 14400 = 7 1304/1440 ÷ 8/8 = 7 163/180