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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

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पृष्ठ 177

त्रिशतिका 149
1 × ½ × ¼ = ⅛ हस्त³
ईंटों की संख्या-
9 ÷ ⅛ या 9 × 8 = 72 ईंटें।
उदाहरणम्
कुण्डे द्विहस्तविस्तरदशकरदैर्घ्ये चतुष्करोच्छ्राये।
वित्तं प्रदीयते किं कर्मकराणां सखे तत्र।। 97।।
हस्तद्वयविस्तारं दलयुतहस्तत्रयायतं कुण्डम्।
सार्धं त्रिकरोच्छ्रायं क्रियते चैकेन रूपेण।। 98।।
न्यासः [चित्र: विस्तार 2, दैर्घ्य 10, उच्छ्राय 4] लब्धं घनहस्ताः 80
पुनर्न्यासः [चित्र: विस्तार 2, दैर्घ्य 3½, उच्छ्राय 3½] लब्धं घनहस्ताः 24½
अथ त्रैराशिकम्
यद्येतावन्तो 24½ हस्ता रूपेण क्रियन्ते तदैतावन्तो 80 हस्ताः कियद्भिः क्रियन्त
इति लब्धं रूपाणि 3, भागश्च 13/49।। इति चितिव्यवहारः।
सुक्षेमा अनुवाद-हे मित्र, 2 हाथ चौड़े, 10 हाथ लम्बे तथा 4 हाथ ऊँचे
कुण्ड को बनाने के लिये कारीगरों को कितनी मजदूरी देनी होगी, यदि 2 हाथ
चौड़े, 3½ या 7/2 हाथ लम्बे तथा 7/2 हाथ ऊँचे कुण्ड के लिये 1 रूप मजदूरी दी जाती
है।
अनुशीलन-इसके लिये पहले दोनों प्रकार के कुण्डों के घन हस्त प्राप्त
करते हैं-
2 × 10 × 4 = 80 घन हस्त का प्रथम कुण्ड।
2 × 7/2 × 7/2 = 24½ घन हस्त का दूसरा कुण्ड।