त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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पूर्वोक्तानुसार इसका पाषाणफलहस्त—
(4743 × 9/2) / 40 = 42687 / 160 = 266 127/160 पाषाण फलहस्त
चितौ सूत्रम्
चयने क्षेत्रस्य फलं समुच्छ्रयेणाहतं चितेर्भवति।
गणितं तदिष्टकायाः फलेन हृतमिष्टकासंख्या।। 58।।
सुक्षेमा अनुवाद—चिति के क्षेत्रफल को उसके समुच्छ्रय या ऊँचाई से गुणा
करने पर चिति का घनफल होता है। इस घनफल को इष्टका के घनफल से
विभाजित करने पर ईंटों की संख्या ज्ञात होती है।
उदाहरणम्
चतुरस्रायतवेदी चितेष्टकाभिः षडंगुलोन्नतिभिः।
हस्तार्धविस्तराभिः करदैर्ध्याभिर्भवेत् तस्याः।। 95।।
विस्तारे हस्तत्रयमायामे षट् समुच्छ्रये त्वर्धम्।
किं घनगणितं विद्वन् प्रकथय का चेष्टका संख्या।। 96।।
न्यासः इष्टकान्यासः
[न्यास रेखाचित्र: वेदी — विस्तार 3, आयाम 6, ऊँचाई 1/2] [इष्टकान्यास रेखाचित्र: ईंट — विस्तार 1/2, आयाम 1, ऊँचाई 1/4]
लब्धं वेदीघनहस्ताः 9। इष्टकानां घनफलम् 1/8 इष्टकासंख्या 72। एवं वृत्त-
त्र्यस्रादिचयनेष्वपि घनफलमिष्टकाश्च साधयेत्।
सुक्षेमा अनुवाद—कोई चतुष्कोण आयत वेदि जो 1 हाथ लम्बी 6 अंगुल
ऊँची या 6/24 अर्थात् 1/4 हाथ ऊँची तथा 1/2 हाथ चौड़ी ईंटों से चुनी गई है तथा जो
चौड़ाई में 3 हाथ, लम्बाई में 6 तथा ऊँचाई में 1/2 हाथ है, उस वेदि का घनफल तथा
उसकी ईंटों की संख्या क्या होगी।
अनुशीलन—यहाँ घनाभ के आयतन के सूत्र ⇒ लम्बाई × चौड़ाई × ऊँचाई
के अनुसार वेदि का घनफल—
3 × 6 × 1/2 = 18/2 = 9 हस्त³
इसी सूत्र के अनुसार ईंटों का घनफल—