त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
पृष्ठ 178, कुल 208 में से
संदर्भ में पढ़ें150 त्रिशतिका
अब पूर्वोक्त त्रैराशिक या ऐकिक नियम के अनुसार–
यदि 24½ हस्त³ के कुण्ड की मजदूरी 1 रूप
तो 1 हस्त³ ,, ,, ,, 1 × 2/49 रूप
तो 80 हस्त³ ,, ,, ,, 80 × 2/49 = 3 13/49 रूप
काष्ठव्यवहारे सूत्रम्
पिण्डायामांगुलवधराशौ काष्ठस्य मार्गसंगुणिते।
द्विगुणद्वादशवर्गेणोर्ध्वच्छेदे फलं भक्ते॥ ५९॥
क्रकचक्षेत्रस्य फलं मार्गाहितमंगुलात्मकं विभजेत्।
षड्गुणचतुष्ककृत्या तिर्यक् छेदे फलं हस्ताः॥ 60॥
सुक्षेमा अनुवाद–कोई काष्ठ पिण्ड, जिसका अंगुल में वर्गफल प्राप्त किया
गया है, उस फल को दारण मार्ग की संख्या से संगुणित करके 12 के द्विगुणित
अर्थात् 24 के वर्ग अर्थात् 576 से विभाजित करने पर सम्पूर्ण काष्ठपिण्ड का हस्त
में वर्गफल प्राप्त होता है।
एक क्रकच या चीरी हुई लकड़ी के क्षेत्रफल को दारण मार्ग से संगुणित
करने से अंगुलात्मक वर्गफल निकलता है। उसे 6 × 4 = 24 के वर्ग अर्थात् 576
से विभाजित करने से सम्पूर्ण का हस्त में वर्गफल प्राप्त होता है।
अनुशीलन–इन श्लोकों में चीरी हुई लकड़ी के क्षेत्रफल का निरूपण
किया गया है। किसी लकड़ी को चीर कर समान लम्बाई चौड़ाई के अनेक पटरे
प्राप्त किये जा सकते हैं। ऐसे किसी पटरे की अंगुल में लम्बाई तथा चौड़ाई प्राप्त
करके उन दोनों को गुणित करने से अंगुल में क्षेत्रफल या वर्ग अंगुल प्राप्त होगा।
इस क्षेत्रफल को समान पटरों की कुल संख्या से गुणित करने पर सभी पटरों का
वर्ग अंगुल प्राप्त होगा।
प्राचीन गणित में 24 अंगुल का एक हस्त माना गया है। अतः 24² = 576
वर्ग अंगुल एक वर्ग हस्त के बराबर है। अतः सभी पटरों के वर्ग अंगुल में प्राप्त
क्षेत्रफल को 576 से विभाजित करने पर उन सभी पटरों का वर्ग हस्त में क्षेत्रफल
प्राप्त हो जावेगा।
उदाहरणम्
द्वादशहस्तायामे खादिरकाष्ठे करार्धदलपिण्डे।
मार्गेषु पञ्चसु भवेदूध्र्वच्छेदे कियद् गणितम्॥ 99॥