त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें146 त्रिशतिका
गोल पिण्ड का आयतन = (गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल × व्यास) / 6
पूर्वोक्त श्लोक 55 में कहा है कि 32×24×8 = 6144 घन अंगुल = 1
पाषाण हस्त। इन अंगुल संख्याओं को 24 से विभाजित करके हस्त संख्याओं में
यह भी कह सकते हैं कि 4/3 ×1×1/3 = 4/9 घन हस्त = 1 पाषाणफलहस्त। यहाँ
श्रीधर ने इस पैमाने को मानते हुए किसी पाषाण-पिण्ड के घन हस्त में प्राप्त
परिमाण को 4/9 से विभाजित करके अर्थात् 9/4 से गुणित करके पाषाण--फल हस्त
प्राप्त करने का निर्देश दिया है।
उदाहरणम्
गोले पाषाणमये घनफलमध्यर्धविस्तारे।
गणयित्वा कथय ततः पाषाणफलं हि यदि वेत्सि॥ 93॥
न्यासः 3/2 लब्धं घनहस्ताः 1 25/32 अतः पाषाणफलहस्ताः 4। अंगुलभागाः 3/16॥
सुक्षेमा अनुवाद-कोई गोल पाषाण, जिसका व्यास 1 1/2 या 3/2 तक विस्तृत है,
उसका घनफल या आयतन गणना करके बताओ, यदि जानते हो।
अनुशीलन-यहाँ श्लोक से प्राप्त सूत्र के अनुसार-
19/36 × (3/2)³ = (513 ÷ 9) / (288 ÷ 9) = 57/32 = 1 25/32
घन हस्त या गोल पाषाण का आयतन
इसका पाषाणफल हस्त प्राप्त करने के लिये पूर्वोक्त संक्रिया करने पर
57/32 × 9/4 = 513/128 = 4 1/128 पाषाण फल हस्त
श्लोक 55 में पाषाणफलहस्त बनाने की विधि द्वारा भी हम यही परिणाम
प्राप्त करते हैं-
3/2 × 24 = 36
19/36 × 36³ = 24624
(24624 ÷ 12) / (6144 ÷ 12) = 2052 / 512 = 4 1/128 पाषाण फल हस्त
उदा-श्लोक 92 में कहे उदाहरण को इस विधि से हल करने पर भी हम
पूर्वोक्त परिणाम प्राप्त करते हैं-
7/2 × 1/2 × 16/3 × 9/4 = 21 पाषाण फल हस्त