त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary
श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें144 त्रिशतिका
पाषाणफलानयने सूत्रम्
दैर्घ्याङ्गुलानि विस्तृतिपिण्डाङ्गुलताडितानि विभजेत्।
द्विकृतिचतुरेकषड्भिर्भवन्ति पाषाणफलहस्ताः॥ 55॥
सुक्षेमा अनुवाद-किसी पिण्ड या पाषाण के लम्बाई × चौड़ाई × ऊँचाई
द्वारा अंगुल में प्राप्त घनफल को 2 की कृति या वर्ग, चार, एक तथा छह से प्राप्त
संख्या अर्थात् 6144 से विभाजित करने पर उसका 'पाषाणफल-हस्त' प्राप्त होता
है।
अनुशीलन-त्रिशतिकाकार के समय में 'अंकानां वामतो गतिः' इस नियम
के अनुसार अंकों को दाहिने से बाईं ओर पढ़ा जाता था। अतः सबसे पहले इकाई
की संख्या 2²=4, पुनः दहाई की संख्या→4 इस क्रम से पढ़ने पर 6144 संख्या
प्राप्त होती है। उनके समय में 32 अंगुल लम्बा, 24 अंगुल चौड़ा तथा 8 अंगुल
गहरा तथा इस प्रकार 32×24×8=6144 घन अंगुल पाषाण-पिण्ड का 1
'पाषाण-फल-हस्त' यह मानक परिमाण माना गया था¹। अतः इस श्लोक में
किसी भी पाषाण-पिण्ड के घन अंगुल में प्राप्त परिमाण को 6144 से विभाजित
करके 'पाषाण-फल-हस्त' इस मानक मान को जानने की विधि बताई गई है।
उदाहरणम्
सार्धत्रिकरव्यासा करार्धपिण्डा शिला सखे तस्याः।
आयामः पञ्च करास्त्रिभागयुक्ताः फलं किं स्यात्॥ 92॥
हस्तैरंगुलीकृतैर्न्यासः 84, 12, 128 लब्धं पाषाणहस्ताः 21
सुक्षेमा अनुवाद-हे मित्र, जिस शिला की लम्बाई 7/2 हाथ, ऊँचाई 1/2 हाथ
तथा चौड़ाई 5 1/3 या 16/3 हैं, उसका घनफल क्या होगा।
अनुशीलन-24 अंगुल का 1 हस्त होता है। अतः व्याख्या के अनुसार इन
नापियों को 24 से गुणित करके अंगुल में बदल लेते हैं। इसके अनुसार शिला के
क्रमशः 84, 12 तथा 128 अंगुल परिमाण प्राप्त होते हैं। अतः-
84 × 12 × 128 = 129024 घन अंगुल या अंगुल³
129024 ÷ 6144 = 21 'पाषाण फल हस्त'
१. यस्य पाषाणस्य विस्तृतिरंगुलचतुर्विंशतिः, दैर्घ्यमंगुलद्वात्रिंशत् पिण्डमितिश्चाष्टांगुलानि तदेव
पाषाणघनहस्ताख्यं प्रकल्पितमाचार्येणेतीह बोध्यम् - म.म.पं. सुधाकर चतुर्वेदमहाभागानां
टिप्पणी।
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